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क्या झारखंड की तरह दिल्ली चुनाव भी राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ेगी BJP

दिल्ली में आयोजित इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भाषण राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहे. इनके भाषणों में दिल्ली के गिने-चुने मुद्दे ही देखने को मिले.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी (फाइल फोटो-PTI) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी (फाइल फोटो-PTI)
वरुण शैलेश
  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

  • महाराष्ट्र, हरियाणा के बाद झारखंड में भी राष्ट्रीय मुद्दों पर मांगा वोट
  • दिल्ली की रैलियों में पीएम मोदी व शाह राष्ट्रीय मसलों पर बोलते रहे

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों अपने-अपने मुद्दे को लेकर आम जनों के बीच जाना शुरू कर दिया है. विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी दिल्ली में दो बड़े कार्यक्रम कर चुकी है.

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बीजेपी ने अनिधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आभार रैली' आयोजित की. इसके बाद दिल्ली में बीजेपी ने अपने 35 हजार बूथ कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देने के लिए 5 जनवरी 2020 को रैली आयोजित की, जिसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कई बड़े नेता मौजूद थे.

राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित भाषण

दिल्ली में आयोजित इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भाषण राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहे. इनके भाषणों में दिल्ली के गिने-चुने मुद्दे ही देखने को मिले. 22 दिसंबर को रामलीला मैदान में आयोजित रैली में पीएम मोदी का भाषण नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और अर्बन नक्सल जैसे मुद्दों के आसपास केंद्रित रहा है.

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नहीं बोला और अनिधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के बारे में बताया. भारतीय जनता पार्टी दिल्ली के लोगों के लिए अगले चुनाव में अपने मेनीफेस्टो में क्या लाने वाली है, उसके बारे में भी कोई संकेत देती हुई नहीं दिखी.

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प्रधानमंत्री के भाषण में उन समस्याओं का जिक्र भी नहीं दिखा जिसका सामना दिल्लीवासी करते हैं. इसी तरह बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते रहे. उन्होंने उन मुद्दों को रेखांकित नहीं किया जिससे अमूमन दिल्लीवासी दो-चार होते हैं.

अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर अरविंद केजरीवाल के साथ ही कांग्रेस पर निशाना साधा. शाह ने कहा कि नागरिकता कानून पर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने जनता को गुमराह किया और दंगे करवाने का काम किया है. अनिधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने जैसे मुद्दों को छोड़ दिया जाए तो अमित शाह भी दिल्ली के मसलों पर नहीं बोले.

केजरीवाल ने मांगा सुझाव

आखिरकार अमित शाह के भाषण पर अरविंद केजरीवाल ने बोल ही दिया कि, 'मुझे लगा वो (अमित शाह) हमारे कामों की कमियां बताएंगे और दिल्ली के विकास की बात करेंगे. लेकिन उन्होंने मुझे गाली देने के अलावा कुछ नहीं कहा. दिल्ली के लिए उनके पास सुझाव हैं तो बताएं, हम अच्छे सुझावों को अगले 5 साल में लागू करेंगे.'

इन राज्यों में राष्ट्रीय मुद्दों पर मांगा वोट

बहरहाल, बीजेपी के इन दोनों अहम नेताओं के भाषण से क्या ये माना जाए कि बीजेपी दिल्ली में भी झारखंड और अन्य राज्यों की तरह राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहती है. महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में हाल में विधानसभा चुनाव हुए हैं. इन चुनावों में बीजेपी एनआरसी, सीएए, कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर वोट मांगा. 

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स्थानीय मुद्दों की अनदेखी और नतीजे

इसका नतीजा ये रहा कि झारखंड में बीजेपी को गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा. झारखंड में प्रधानमंत्री मोदी ने जितनी भी रैलियां उसमें कश्मीर और अयोध्या मसले का जिक्र करते रहे. जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेवीएम) के हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गठबंधन चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन स्थानीय और आदिवासियों से जुड़े पत्थलगढ़ी, शराबबंदी जैसे मुद्दों पर लोगों से मिलते रहे और चुनाव में जीत हासिल की. बहरहाल बीजेपी के तेवर को देखते हुए लग रहा है कि वह दिल्ली विधानसभा चुनाव भी राष्ट्रीय मुद्दों की बदौलत लड़ेगी.   

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