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झारखंड: कोषागार से पैसों की निकासी बंद, BJP पर खजाना खाली करने का आरोप

झारखंड में ट्रेजरी फ्रीज किए जाने के बाद करोड़ों रुपये के डेवलमेंट प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगा है. इन प्रोजेक्‍ट पर काम करने वाली कंपनियों के पेमेंट रोक दिए गए हैं. सरकार ने नए टेंडर निकालने और चल रहे टेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगा रखी है. एक अनुमान के मुताबिक झारखंड में अभी 5000 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर अटके पड़े हैं.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो-PTI) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो-PTI)
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 23 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

  • झारखंड की नई सरकार में अब तक नहीं हो सका कैबिनेट विस्तार
  • कैबिनेट विस्तार न होने से बढ़ी मुश्किलें, वित्तीय आपात से लोग प्रभावित

झारखंड के सरकारी कोषागार से पिछले एक महीने से पैसों की निकासी बंद हैं. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी के अलावा किसी दूसरे मकसद के लिए पैसों की निकासी रुकी हुई है. इसे लेकर कई तरह की चर्चा गर्म हैं. कांग्रेस नेता आरोप लगाते हैं कि पिछली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार ने झारखंड का खजाना खाली कर दिया है.

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सरकार के मुख्य सचिव की मानें तो पूर्ण कैबिनेट का विस्तर नहीं होना इसकी मुख्य वजह है. जाहिर है कि कैबिनेट में खाली जगह नहीं भरे जाने से अजीबो-गरीब हालात हैं. इसका असर आम जनता पर भी पड़ता दिख रहा है.

कैबिनेट विस्तार न होने से क्या-क्या हो रहा है प्रभावित?

1. डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट की रफ्तार थमी

2. पांच हजार करोड़ से अधिक के टेंडर लंबित

3. सरकार गठन नहीं होना सबसे बड़ी वजह

4. नहीं सुलझ रहा मंत्रिमंडल विस्‍तार का पेंच

5. वित्‍तीय आपात से पूरा सिस्‍टम प्रभावित

डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट की रफ्तार पर ब्रेक

झारखंड में ट्रेजरी फ्रीज किए जाने के बाद करोड़ों रुपये के डेवलमेंट प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगा है. इन प्रोजेक्‍ट पर काम करने वाली कंपनियों के पेमेंट रोक दिए गए हैं. सरकार ने नए टेंडर निकालने और चल रहे टेंडर की प्रक्रिया पर रोक लगा रखी है. एक अनुमान के मुताबिक झारखंड में अभी 5000 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर अटके पड़े हैं.

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पांच हजार करोड़ से अधिक के टेंडर लंबित

एक अनुमान के मुताबिक राज्य के विभिन्न कार्य विभागों में सरकार के इस निर्णय से लगभग पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के टेंडर पर ब्रेक लग गया है. जानकारी के अनुसार, फिलहाल भवन निर्माण विभाग में दो हजार करोड़, ग्रामीण विकास में एक हजार करोड़, पथ निर्माण में एक हजार करोड़, वहीं अन्य विभागों में लगभग एक हजार करोड़ रुपये के टेंडर निकालने की प्रक्रिया स्थगित हो गई है.

प्रोजेक्ट में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा हर माह लगभग 60 करोड़ के बालू, 50 करोड़ के चिप्स और लगभग 100 करोड़ के ईंट की सप्लाई की जाती है. उनका भी भुगतान नहीं हो पाया है. प्रदेश में आपूर्तिकर्ताओं का लगभग 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक का भुगतान लंबित है. सरकार के मंत्री रामेश्वर ओरांव इसे जल्द सुलझा लेने के दावे कर रहे हैं.

जारी टेंडर पर भी रोक

मुख्य सचिव स्तर से सभी विभागों को जारी पत्र में कहा गया है कि जो पहले टेंडर निकले हैं और डाले जा चुके हैं उन्हें भी फाइनल नहीं करें. मुख्य सचिव ने 24 दिसंबर 2019 और 10 जनवरी 2020 को सभी विभागों को पत्र लिखकर सरकार के पूर्ण गठन तक नई योजनाओं को स्वीकृत नहीं करने और राशि जारी नहीं करने का आदेश दिया था. इस आदेश के बाद से विकास कार्यों की गति तत्काल रूक गई है.

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इस पत्र में साफ तौर पर कहा गया कि सभी स्‍तरों पर किसी भी प्रकार की नई योजना या कार्य की स्‍वीकृति नहीं दी जाए. सभी प्रकार के सिविल निर्माण कार्यों से संबंधित किसी भी अग्रिम या अन्‍य प्रकार का भुगतान तब तक न किया जाए जब तक कि नई सरकार का विधिवत गठन नहीं हो जाता है.

'कैबिनेट विस्तार से न हो जनहित प्रभावित'

इसका असर ऐसे समझा जा सकता है कि एक प्रमोद नाम के कॉन्ट्रैक्टर जो भवन निर्माण विभाग में संवेदक उनका 35 लाख रुपया बकाया है. भुगतान नहीं होने से इन्हें दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है. बकायेदार तगादा कर रहे हैं और मजदूर बेचारों को खाने के लाले हैं. अन्य संवेदक भी परेशान हैं.

इस मद्दे पर विपक्ष जमकर सरकार पे निशाना साध रही है. उनका साफ मानना है कि सरकार प्राइवेट लिमिटेड के तरह काम कर रही है. बीजेपी विधायक सीपी सिंह कहते हैं कि कैबिनेट के विस्तार की वजह से जनहित का प्रभावित होना अच्छी बात नहीं है. जाहिर है कैबिनेट का विस्तार लटके रहने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन सवाल ये है कि आखिर जनता कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा(जेएमएम) के बीच विभागों या अन्य मुद्दों पे तालमेल नहीं बैठने के लिए खामियाजा क्यों भुगते?

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