
चौतरफा हमले से घिर कर एक तरफ जहां इराक में अब आईएसआईएस के पांव उखड़ने लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ उसका सरगना अबु बकर अल बग़दादी अपने कायर आतंकवादियों की फौज में नई जान फूंकने की आखिरी कोशिश कर रहा है. और ये कोशिश है एक ऑडियो मैसेज की सूरत में, जिसे बगदादी ने मैदान-ए-जंग में पीठ दिखा कर भागते अपने सिपहसालारों को हौसला देने के लिए रिलीज़ किया है.
करारी शिकस्त से घबराया बगदादी
इस ऑडियो मैसेज का मजमून कुछ यूं है, 'इत्मीनान रखो कि अल्लाह हर उस शख्स को कामयाबी अता फरमाएगा जो उसकी इबादत करेगा. इत्मीनान रखो कि तुम ये जरूर सुनोगे कि हमारी स्टेट बिल्कुल ठीक है. हमारे खिलाफ जितने हमले होंगे, हम उतने ही पाक होंगे और हमारी एकता उतनी ही बढ़ेगी. हम वादा करते हैं कि जो भी आईएसआईएस के खिलाफ इस जंग में भाग ले रहा है, वो चाहे अमेरिका हो, रूस हो, इज़रायल हो या फिर यूरोप हो, हर किसी को इसकी कीमत चुकानी होगी. उन्हें पछताना होगा.' लेकिन बगदादी की गीदड़भभकी और आईएसआईएस की तमाम धमकियों के बीच अब सबसे अच्छी खबर ये है कि आमने-सामने की लड़ाई के बाद अब इराक में आईएसआईएस को करारी शिकस्त मिली है.
बगदादी की आवाज की पुष्टि नहीं
इराक के अनबार प्रोविंस का एक अहम शहर रमादी अब आईएसआईएस के हाथ से निकल गया है. वो रमादी शहर, जिस पर आईएसआईएस ने मई 2014 यानी पिछले डेढ़ साल से कब्जा कर रखा था. हालांकि रमादी पर इराकी फौज के कब्जे की इस नई खबर के बीच फिलहाल खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां इस बात की तस्दीक नहीं कर सकी है कि ट्विटर एकाउंट्स के ज़रिए रिलीज की गई ये आवाज बगदादी की ही है या नहीं. लेकिन जानकार इसे बगदादी की घबराहट के तौर पर जरूर देख रहे हैं. दरअसल, रविवार को इराक में जो हुआ, वैसा हाल के दिनों में कभी नहीं हुआ था. अमेरिका की अगुवाई में कोलिशन फोर्सेज आईएसआईएस के ठिकानों पर हमले तो कर ही रही थी, अमेरिका से ही ट्रेनिंग हासिल करने के बाद इराक की सरकारी फौज ने भी राजधानी बगदाद के पश्चिमी हिस्से में बसे इस शहर में आईएसआईएस के होश ठिकाने लगा दिए.
जमीन-हवा की दोहरी मार से परेशान बगदादी
रमादी के कई हिस्सों में आतंकवादियों के साथ इराकी फौज की टुकड़ों में टकराहट चल रही थी, लेकिन हाल ही में नेटो मुल्कों के फाइटर जेट्स ने आसमान से जो हमले किए उसने आतंकवादियों को छिपने का भी मौका नहीं दिया. और रविवार को जब इराक की फौज प्रोवेंशियल गवर्नमेंट कांप्लेक्स पर कब्जे के लिए आगे बढ़ी, तो पूरी की पूरी इमारत आतंकवादियों से खाली हो चुकी थी. हालांकि इससे पहले जो इक्के-दुक्के आतंकवादी बचे हुए थे, उन्हें फौज ने सबक सिखा दिया. शनिवार को हौज इलाके में आमने-सामने की लड़ाई में फौज ने आईएसआईएस के 12 आतंकवादियों की लाशें बिछा दीं और बहुत सी ऐसी गाड़ियों को बमों से उड़ा दिया, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी आगे हमलों के लिए करनेवाले थे.
काउंटर टेररिज्म के प्रवक्ता अल नोमान ने बताया, 'हमने आईएसआईएस पर दो तरफा हमले किए. जमीन पर हम आमने सामने की लड़ाई कर रहे थे और आसमान से एयर फोर्स और कोलिशन देशों ने उनके ठिकानों पर हमले किया. हमने 12 आतंकवादियों को मार किया और उनके वाहन नष्ट कर दिए. रमादी में जब हम सरकारी इमारत पर कब्जे के लिए पहुंचे, तब तक इमारत आतंकवादियों से खाली हो चुकी थी.' बेशक, ये बात सही हो कि इराक का एक बड़ा इलाका अब भी आतंकवादियों के कब्जे में है, लेकिन रमादी पर आईएसआईएस के पांव उखड़ने को एक अच्छी शुरुआत के तौर पर तो देखा ही जा रहा है. चारों ओर से घिर चुका आईएसआईएस का सरगना अबु बकर अल बगदादी बेशक नए ऑडियो के जरिए खुद को बेखौफ और बेफिक्र साबित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत यही है कि अब उसे जान के लाले पड़ गए हैं. वो दुम दबा कर भाग रहा है. कभी इराक, कभी सीरिया तो कभी लीबिया.
जानकारों की मानें तो इराक से लेकर सीरिया तक इस्लामिक स्टेट के खिलाफ दुनिया के तमाम मुल्कों ने जो मोर्चा खोल रखा है, उसे देख कर लगता है कि आनेवाले चंद महीनों में ही आईएसआईएस का सफाया हो सकता है. और ऐसे में बगदादी के पास अब भागने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा है. ख़बर ये है कि इराक और सीरिया में कमजोर पड़ने के बाद अब बगदादी लीबिया भाग गया है. ईरानी समाचार एजेंसी FARC के मुताबिक बगदादी सिराया से रक्का से भाग लीबिया पहुंच गया है. उसे लीबिया के सिरते शहर में देखा गया है. सिरते अभी भी लीबिया में आईएसआईएस का गढ़ बना हुआ है और जान बचाने के लिए बगदादी को इससे सुरक्षित कोई दूसरी जगह फिलहाल नजर नहीं आ रही है.
बगदादी की ये हालत इसलिए भी है, क्योंकि इराक और सीरिया दोनों ही मुल्कों में उसके ज्यादातर भरोसेमंद सिपहसालार मारे जा चुके हैं. इराक में अक्टूबर महीने में अपने काफिले पर हुए हमले में भी बगदादी बुरी तरह ज़ख्मी हो गया था. जिसके बाद उसे सीरिया के रक्का शहर में अपनी सर्जरी भी करवानी पड़ी थी. लेकिन चूंकि वहां इलाज का इंतजाम सही नहीं था, वो छिपते-छिपाते तुर्की पहुंचा था. लेकिन बताते हैं कि जैसे ही खुफिया एजेंसियों को उसके तुर्की में होने की भनक लगी, वो तुर्की से भाग कर लीबिया पहुंच गया. बगदादी किस तरह लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी में उसके इराक में होने की खबर थी, तो जून में सीरिया के रक्का में. अक्टूबर में वो फिर से इराक में था, जबकि हमले के बाद वो वहां से सीरिया पहंचा और फिर तुर्की से होता हुआ लीबिया में जा छिपा. बगदादी की ये चूहा दौड़ दरअसल मैदान ए जंग में उसके लगातार घिरने का ही सुबूत है.