किशोर बियानी की फ्यूचर ग्रुप के साथ दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की कानूनी लड़ाई में अब नया मोड़ आ गया है. भारत के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने अमेजन पर आरोप लगाया है कि जब कंपनी ने फ्यूचर ग्रुप में 2019 के निवेश के लिए मंजूरी मांगी थी, तो उसने तथ्यों को छिपाया. साथ ही गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया है.
सीसीआई ने एक पत्र में कहा है कि अमेजन ने साल 2019 में फ्यूचर रिटेल में अपनी रणनीतिक रुचि का खुलासा नहीं किया और लेनदेन के तथ्यात्मक पहलुओं की भी जानकारी नहीं दी. पत्र में कहा गया है कि आयोग के समक्ष अमेजन का प्रतिनिधित्व और आचरण गलत बयान देने और तथ्यों को छुपाने के बराबर है.
अमेजन को कारण बताओ नोटिस देते हुए सीसीआई ने सवाल किया है कि गलत जानकारी देने के लिए कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए. अमेजन ने भी कहा है कि उसे CCI का एक खत मिला है. अमेजन का कहना है कि वह भारतीय कानूनों का सम्मान करता है और उसका पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.
बता दें कि बीते साल सीसीआई ने रिलायंस और फ्यूचर समूह की डील को मंजूरी दे दी थी. जिसके बाद फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस के बीच हुई डील को रोकने के लिए अमेजन ने अदालत का रुख किया था. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है. इस मामले में 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई.
सिंगापुर के आपातकालीन पंचाट ने इस डील पर रोक लगा रखी है. सिंगापुर की अदालत ने इस मामले पर अंतिम सुनवाई 12 जुलाई को शुरू की थी. खबर है कि इस मामले में सुनवाई पूरी हो गई है. अमेजन की शिकायत पर पिछले साल सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (SIAC) ने फ्यूचर समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच 24,713 करोड़ रुपये की डील पर रोक लगा दी थी.
गौरतलब है कि किशोर बियानी की फ्यूचर ग्रुप की कंपनियां कर्ज में डूबी हैं. कर्ज कम करने के लिए पिछले साल किशोर बियानी ने अपना कुछ कारोबार मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल को बेचने का फैसला लिया. फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस के बीच यह डील 24,713 करोड़ रुपये में हुई थी.
इस डील की खबर जब अमेजन को लगी तो उसने कहा कि उसे इस डील से आपत्ति है. अमेजन की मांग है कि यह डील रद्द हो. अमेजन का तर्क है कि फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपंस में उसकी हिस्सेदारी है.
अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप की गिफ्ट वाउचर इकाई में 49% हिस्सेदारी के लिए 2019 में 192 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था. अमजेन ने तर्क दिया है कि इस सौदे की शर्तें फ्यूचर ग्रुप को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के कारोबार को रिलायंस को बेचने से रोकती हैं.