दानवीर उद्योगपति कहलाने वाले अजीम प्रेमजी का आज 72वां जन्मदिन है. जानिए किस एक घटना ने उन्हें पाकिस्तानी बनने से बचा लिया था.
अजीम प्रेमजी को अपने पिता मोहम्मद हासम प्रेमजी से 1966 में वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स नामक कंपनी विरासत में मिली थी. बाद में इसका नाम ही WIPRO पड़ा.
बहुत कम लोगों को पता है कि जब देश का विभाजन हुआ, तब मोहम्मद अली जिन्ना ने मोहम्मद हासम प्रेमजी से कहा था कि तुम ‘पढ़े-लिखे मुसलमान हो, एक मजबूत मुस्लिम राष्ट्र बनाने में मेरी मदद करो. मेरे साथ पाकिस्तान चलो और वहां मनचाहा पद संभालो.’
उस समय अजीम प्रेमजी के पिता को राइस किंग ऑफ बर्मा कहा जाता था. उन्होंने जिन्ना का ये ऑफर ठुकरा दिया और कहा- INDIA IS MY HOME
अजीम प्रेमजी को महादानी कहा जाता है. अब वे विप्रो का करीबन आधा हिस्सा दान कर चुके हैं. जितनी प्रॉपर्टी वे दान कर चुके हैं उसकी कीमत करीबन 27 हजार करोड़ से अधिक बताई जाती है.
अपने पिता के नख्शेकदम पर चलते हुए अजीम प्रेमजी इंडिया को ही अपना एकमात्र घर बताते हैं. 1000 अरब रुपए से ज्यादा बिजनेस 67 देशों में फैला हुआ है पर उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि वे इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं, हजारों करोड़ दान करने वाले प्रेमजी ने अपने ही एक कर्मचारी से सेकंड हैंड मर्सडीज-बेंज खरीदी. प्रेमजी ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की थी, यह देशभर में स्कूलों को बेहतर बनाने का काम करता है.