दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान के बाद अब 11 फरवरी को मतगणना और रिजल्ट का दिन है. EVM मशीनों को स्ट्रांग रूम में रखकर रूम को सील कर दिया गया है. पोलिंग स्टेशनों से आए डेटा की स्क्रूटनी के बाद चुनाव आयोग ने बताया है कि दिल्ली में 62.59 प्रतिशत वोटिंग हुई है. आइए जानते हैं कि EVM और VVPAT का मतदान और मतगणना में क्या रोल है. इसमें हमारा वोट कितना सुरक्षित रहता है.
आपको बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कैद आपका हर वोट पूरी तरह सुरक्षित है. मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में रखे गए EVM मतगणना के दिन ही निकाले जाएंगे, फिर मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती शुरू होगी.
11 फरवरी को सुबह आठ बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी, जिसके आधे घंटे बाद ही रुझान आने शुरू हो जाएंगे. यहां रिटर्निंग आफिसर के अलावा चुनाव में खड़े प्रत्याशी, इलेक्शन एजेंट, काउंटिंग एजेंट भी रहेंगे, ऑफिशियल कैमरे से इसकी वीडियोग्राफी होगी.
कैसे होती है सुरक्षा
वोटिंग से लेकर काउंटिंग तक EVM की तीन लेयर में सुरक्षा होती है. जिसमें पहली लेयर में पैरामिलिट्री फोर्स, दूसरी लेयर में पीएसी के जवान और तीसरी लेयर में राज्य पुलिस के जवान तैनात होते हैं. EVM की सुरक्षा के लिए सभी जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं. जिनकी ड्यूटी के समय के अनुसार तय की जाती है.
इनकी नजरों के सामने सील होती है EVM
लोकसभा चुनाव में पीठासीन अधिकारी रहे संतोष कुमार सक्सेना बताते हैं कि, वोटिंग होने के बाद सभी EVM मशीनों को ध्यान से कैरिंग बैग में डाल दिया जाता है. जिसके बाद प्रेक्षक अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, एसपी, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, अनुविभागीय अधिकारी, पार्टियों के प्रतिनिधियों के सामने ईवीएम को सील किया जाता है.
बता दें, इन मशीनों पर पोलिंग बूथ का एड्रेस और पीठासीन अधिकारी के दस्तखत होते हैं. इस दौरान हर पार्टी के 2-2 एजेंट मौजूद होते हैं. इसमें एक मुख्य एजेंट और दूसरा रिलीवर होता है. किसी भी पोलिंग बूथ पर एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी होते हैं.
कैसे होती है EVM में वोटों की गिनती
मतगणना केंद्र पर तैनात पर्यवेक्षक के टेबल पर एक-एक EVM मशीन भेजी जाती है. इस तरह हरेक विधान सभा क्षेत्र के लिए एक साथ ईवीएम की गिनती एक साथ होती है. अमूमन हर दौर में 30 से 45 मिनट का समय लगता है. मतगणना टेबल के चारों ओर पार्टियों या उम्मीदवारों के एजेंट रहते हैं, जो मतगणना पर पैनी नजर रखते हैं.
EVM का पोलिंग बूथ से स्ट्रांग रूम का सफर
पोलिंग बूथ से स्ट्रांग रूम तक EVM लाने का सफर कड़ी निगरानी में किया जाता है. इस दौरान EVM में किसी तरीके की छेड़छाड़ संभव नहीं है. आपको बता दें, स्ट्रांग रूम में ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में सभी EVM मशीनों सील कर दिया जाता है. वहीं जिस कमरे में सभी EVM मशीनें रखी जाती हैं. उस कमरे की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाता है. कमरे के दरवाजे पर डबल लॉक लगाने के बाद एक 6 इंच की दीवार भी बनाई जाती है. ताकि कोई भी EVM मशीनों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न कर सके.
बता दें कि ईवीएम के पिजन होल बॉक्स की पर्चियों की संख्या से भी वोटों की संख्या का मिलान होगा. ये वही पर्चियां हैं जो आपको वोट डालते समय EVM के दाईं तरफ से निकलती दिखाई दी थीं. इन पर्चियों की गणना भी वोटों की गिनती के साथ होनी है.
पिछली बार ईवीएम को लेकर विवाद हुआ था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट के निर्णय के बाद पहली बार पांच VVPAT का वोटों की गिनती में इस्तेमाल हो रहा है. इससे वोटों की गिनती में किसी भी प्रकार के हेरफेर की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है.