जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की सफुरा जर्गर और छात्र राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य मीरान हैदर सहित जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है. उमर खालिद पर आरोप है कि उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली समेत दो जगह भड़काऊ भाषण दिए जिसमें नागरिकों से अपील की कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान सड़कों पर आएं और रास्ते अवरुद्ध करें ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये बात जाए कि भारत में अल्पसंख्यकों को किस तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है. आइए जानें- क्या है UAPA एक्ट, इसके तहत होती है क्या कार्रवाई.
बता दें कि संसोधन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले आठ जुलाई 2019 को यूएपीए बिल लोकसभा में पेश किया था. सरकार के इस बिल के पीछे की मंशा बढ़ते आतंकवाद पर लगाम कसना बताया जा रहा था.
ये कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी असीमित अधिकार देता है. अब तक के नियम के मुताबिक एक जांच अधिकारी को आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में संपत्ति सीज करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन अब यह विधेयक इस बात की अनुमति देता है कि अगर आतंकवाद से जुड़े किसी मामले की जांच एनआईए का कोई अफसर करता है तो उसे इसके लिए सिर्फ एनआईए के महानिदेशक से अनुमति लेनी होगी.
नए प्रस्तावित संशोधनों के बाद अब एनआईए के महानिदेशक को ऐसी संपत्तियों को कब्जे में लेने और उनकी कुर्की करने का अधिकार मिल जाएगा जिनका आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया. अब इसके लिए एनआईए को राज्य के पुलिस महानिदेशक से अनुमति लेने की जरुरत नहीं होगी.
अब तक के नियम के अनुसार, ऐसे किसी भी मामले की जांच डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) रैंक के अधिकारी ही कर सकते थे. लेकिन अब नए नियम के मुताबिक एनआईए के अफसरों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं. अब ऐसे किसी भी मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अफसर कर सकते हैं.