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तीन तरीके से फैल रहा कोरोना संक्रमण, जानें किसके क्या हैं लक्षण

aajtak.in
  • 11 जून 2020,
  • अपडेटेड 7:06 AM IST
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कोरोना वायरस संक्रमण के मामले पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रहे हैं.  इसके रोकथाम में सबसे बड़ी चुनौती है इससे संक्रमित लोगों की पहचान करना. जहां कुछ मामलों में कोरोना से संक्रमित लोगों में स्पष्ट लक्षण नजर आ जाते हैं, वहीं कुछ लोगों में कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भी कोई लक्षण नजर नहीं आता.

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फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस का संक्रमण तीन तरह से हो रहा है- एसिम्प्टमैटिक, प्रिसिम्प्टमैटिक और सिम्प्टमैटिक. एसिम्प्टमैटिक मामले वे हैं जिनमें कोरोना वायरस का संक्रमण तो है लेकिन उनमें किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते हैं यानी उनमें खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसी कोई समस्या नहीं होती है. प्रिसिम्टमैटिक वे मामले हैं जिनमें संक्रमण होने के कुछ दिनों बाद लक्षण नजर आते हैं. वहीं, सिम्प्टमैटिक केस वे हैं जिनमें संक्रमित शख्स में बुखार, बहती नाक, खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं.

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डॉ. प्रवीण गुप्ता ने कहा, शुरुआत में कहा जा रहा था कि बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित तेजी से वायरस को फैला सकते हैं. लेकिन असल में ये लोग एसिम्प्टमैटिक ना होकर प्रिसिम्प्टमैटिक होते हैं या फिर ऐसे वाहक होते हैं जिनमें बदन दर्द जैसे हल्के लक्षण ही नजर आते हैं.

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उन्होंने कहा, प्रिसिम्प्टमैटिक लोगों में लक्षण दिखने से 48 घंटे पहले से ही वायरस फैलना शुरू हो जाता है. ऐसे लोग खतरनाक होते हैं क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होते हैं और वे किसी तरह की सावधानी भी नहीं बरतते हैं. प्रिसिम्टमैटिक लोगों से कोरोना वायरस फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है. यूएस सेंटर्स ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि प्री सिम्प्टोमैटिक के 40 प्रतिशत मरीज अस्वस्थ महसूस करने से पहले ही संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं.

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गंगाराम हॉस्पिटल में इम्यूनोलॉजी ऐंड माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. चंद वत्तल ने बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर कहा, विश्व स्वास्थ्य संगठन को इस तरह का कोई भी बयान देने से पहले ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए हमें सबूतों की जरूरत है. अभी तक जो भी स्टडीज आई हैं, वे ज्यादातर ऑनलाइन स्टडीज हैं.

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डॉ. वत्तल ने कहा, एसिम्प्टमैटिक मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि हमें उनके कॉन्टैक्ट के बारे में भी जानकारी नहीं होती है. ऐसे मामलों में लोगों के कॉन्टैक्ट पर खास ध्यान देने की जरूरत है.

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डॉ. वत्तल ने कहा, परिभाषा की ज्यादा गहराई में जाए बिना हम ये कह सकते हैं कि भारत में लोकल ट्रांसमिशन है. यही वजह है कि हमने हॉटस्पॉट और कंटेनमेंट जोन बनाए हैं. ये भी एक तथ्य है कि कोरोना संक्रमण का प्राथमिक स्रोत एसिम्टमैटिक या बिना लक्षण वाले लोग नहीं हैं.

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भारत में नहीं होता है एसिम्प्टमैटिक लोगों का टेस्ट

इन आंकड़ों से भारत के टेस्टिंग सिस्टम पर भी सवाल उठता है. ICMR की गाइडलाइन्स के मुताबिक, सिर्फ लक्षण वाले लोग ही कोरोना वायरस का टेस्ट करा सकते हैं. 18 मई के जारी एक और गाइडलाइन में कहा गया कि, 'हाई रिस्क एसिम्प्टमैटिक और कोरोना वायरस के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों के भी टेस्ट किए जाने चाहिए.' भारत के विशेषज्ञों को लगता है कि ICMR को अब अपनी टेस्टिंग रणनीति संशोधित करनी चाहिए और नई बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादा टेस्टिंग करानी चाहिए. ICMR के रिसर्च टास्क के सदस्य और PHFI में महामारी विज्ञान के प्रमुख प्रोफेसर गिरिधर बाबू का कहना है, 'कई प्रमाण स्पष्ट रूप से ये संकेत दे रहे हैं कि एसिम्प्टमैटिक लोग भी कोरोना वायरस फैला सकते हैं. केवल 10 फीसदी एसिम्प्टमैटिक लोगों में लक्षण आ सकते हैं.

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पल्मोनोलॉजिस्ट और एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा, 'मेरा मानना है कि हम लोगों को अब यह सोच कर चलना चाहिए कि हम जिस किसी से भी मिलते हैं वो एसिम्प्टमैटिक पॉजिटिव है. दिल्ली या कई अन्य शहरों में ऐसी ही स्थिति है. बाजार, अस्पताल या कहीं भी घूमने जा रहे हैं तो ये याद रखें कि आपके आस-पास कोई भी एसिम्प्टमैटिक व्यक्ति हो सकता है. खासतौर से जब लॉकडाउन खुल रहा है तो ये और भी जरूरी हो जाता है.'

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