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चीन ने माना कि उइगर मुसलमानों में जन्म दर गिरी, मुस्लिम महिलाओं की नसबंदी से इंकार

aajtak.in
  • 23 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST
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चीन सिर्फ दुनिया भर के देशों को ही परेशान नहीं कर रहा है. वह अपने देश के अंदर मौजूद अन्य धर्मों के लोगों पर भी अत्याचार कर रहा है. एक ब्रिटिश मीडिया वेबसाइट पर खबर छपी है कि चीन ने इस बात को माना है कि शिनजियांग राज्य में रहने वाले उइगर मुसलमानों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है. हालांकि, चीन यह बात मानने को तैयार नहीं है कि उसने डिटेंशन सेंटर में उइगर मुस्लिम महिलाओं का गर्भपात या नसबंदी कराई है. 

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ब्रिटिश मीडिया संस्थान डेली मेल के अनुसार इससे पहले बीजिंग में मौजूद चीनी सरकार के नुमाइंदों ने कहा था कि उइगर मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है. जबकि, उइगर कह रहे थे कि हमनें अपनी महिलाओं को जबरदस्ती गर्भपात और गर्भनिरोधक के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि उइगर मुसलमानों की आबादी कम की जा सके. 

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी सरकार ने अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन से ये बात मानी है कि शिनजियांग में 2017 से 2018 के बीच जन्म दर में एक तिहाई की गिरावट आई है. आपको बता दें कि करीब 10 लाख उइगर मुसलमान चीन के डिटेंशन कैंप में बंद हैं. इसे लेकर दुनियाभर में चीन की काफी निंदा भी हुई है. 

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आरोप लगाया जाता है कि चीन इन डिटेंशन कैंप्स में उइगर मुसलमानों की आबादी कम करने के लिए जबरदस्ती नसबंदी और गर्भपात कराता है. हालांकि, दुनिया को दिखाने के लिए डिटेंशन कैंप का नाम वोकेशनल स्किल एजुकेशन सेंटर रखा गया है. कुछ डॉक्टरों ने नाम ने बताने की शर्त पर उइगर मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों के बारे में बताया है. 

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शिनजियांग में करीब 1.10 करोड़ उइगर मुस्लिम रहते हैं. उइगर मध्य एशिया से अपने सांस्कृतिक और भाषाई संबंध रखते हैं. चीन की सरकार चाहती है कि शिनजियांग में बहुसंख्यक हान समुदाय के लोग जाकर बस जाएं. चीन का ये प्रयास साल 1949 से चला आ रहा है. उइगरों ने कई बार हान समुदाय की बढ़ती आबादी और सरकार द्वार लगाए जा रहे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों का विरोध किया है. 

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तिब्बत की तरह ही चीन में शिजियांग भी राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील इलाका है. इस इलाके में बहुतायत में तेल के रिजर्व हैं. शिनजियांग की सीमाएं भारत, रूस और पाकिस्तान से भी सटती हैं. इस इलाके में पहले भयानक हिंसा तब भड़की थी जब चीन की सरकार ने आरोप लगाया था कि उइगर मुसलमान अलकायदा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. 

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मानवाधिकार समूहों का कहना है कि चीन ने उइगर समुदाय के खिलाफ लड़ाई इसलिए छेड़ी थी क्योंकि उन्हें लगता था कि इस समुदाय के लोग अमेरिका द्वारा फंडेंड आतंकी मिशन का हिस्सा है. इसके बाद चीन ने उइगर मुसलमानों के खिलाफ बच्चे कम पैदा करने की मुहिम चलाई लेकिन उइगर इस बात के लिए तैयार नहीं हुए. बाद में चीन ने अपनी एक बच्चा नीति से उइगरों को बाहर कर दिया. 

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जबसे, शी जिनपिंग सत्ता में आए हैं तब से उइगर समुदाय के लोग एकजुट हो गए हैं ताकि अपने परिवार को बड़ा कर सके. लेकिन उनकी महिलाओं को जबरदस्ती डिटेंशन सेंटर में डाल दिया गया और उनकी गर्भपात या नसबंदी कर दी जा रही है. इन डिटेंशन सेंटरों की तुलना जर्मनी के नाजी कंसेंट्रेशन कैंप से भी की जा रही है. 

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