एक तरफ अमेरिका कोरोना वायरस के एक लाख से अधिक मृतकों का शोक मना रहा है, दूसरी ओर एक अश्वेत व्यक्ति की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हो रही है. मामला इतना बढ़ गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्मी को तैयार रहने को कहा है. वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं.
क्यों उबल रहा है अमेरिका- वजह है 46 साल के एक अश्वेत नागरिक की पुलिस कस्टडी में मौत. उनका नाम जॉर्ज फ्लॉयड था. जॉर्ज अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के थे. ये घटना सोमवार को मिनियापोलिस शहर में हुई. घटना को लेकर लोगों का गुस्सा तब बढ़ने लगा जब एक वीडियो में देखा गया कि सड़क पर गिरे जॉर्ज के गले को गोरे पुलिस वाले ने घुटने से दबा रखा है. इस दौरान जॉर्ज कहते हैं कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. आखिरकार जॉर्ज की मौत हो जाती है.
जॉर्ज की मौत ने अमेरिका में एक बार फिर से काले और गोरे की बहस छेड़ दी है. अमेरिका में लंबे वक्त से अश्वेत लोग प्रताड़ना और पूर्वाग्रह के शिकार होते रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद 4 पुलिस वालों को नौकरी से हटा दिया गया और जांच का ऐलान कर दिया गया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पुलिस वालों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए.
घटना को लेकर मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने कहा कि अगर जॉर्ज श्वेत होते
तो आज जिंदा होते. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि 2020 के
अमेरिका में ऐसी घटना सामान्य नहीं होनी चाहिए.
घटना के कई रोज बाद जॉर्ज के गले को घुटना से दबाने वाले पुलिस अधिकारी पर
थर्ड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया. लेकिन जॉर्ज के लिए न्याय की मांग
करते लोग सड़कों पर उतर आए. अमेरिका के करीब एक दर्जन शहरों में प्रदर्शन
हुए हैं. मिन्नेसोटा राज्य में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस स्टेशन को आग के
हवाले कर दिया. राज्य में इमरजेंसी का ऐलान करना पड़ा.
पुलिस के मुताबिक, जॉर्ज पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 20 डॉलर (करीब 1500 रुपये) के फर्जी नोट के जरिए एक दुकान से खरीदारी की कोशिश की. पुलिस का कहना था कि उन्होंने गिरफ्तारी का शारीरिक रूप से विरोध किया इसके बाद बल प्रयोग किया गया. (फाइल फोटो में जॉर्ज फ्लॉयड)