भारतीय किसानों के समर्थन में ट्वीट करने के बाद से ही सुर्खियों में चल रहीं लोकप्रिय क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग एक बार फिर चर्चा में हैं. दुनिया के कई देश पिछले कुछ समय में मंगल ग्रह पर जाने को लेकर काफी उत्सुक हैं और इस साल तीन देशों के स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह पहुंच सकते हैं. ग्रेटा के क्लाइमेट चेंज मूवमेंट फ्राइडे फॉर फ्यूचर ने इसी उत्साह पर कटाक्ष करते हुए पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को जलवायु परिवर्तन से होने वाली दिक्कतों को लेकर आगाह भी किया है. (फोटो क्रेडिट: Getty Images)
फ्राइडे फॉर फ्यूचर की एक प्रवक्ता ने कहा कि इस विज्ञापन के सहारे हम दिखाना चाहते थे कि ये सब कितना बकवास है. सरकार द्वारा फंडेड स्पेस प्रोग्राम और दुनिया के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोग आज के दौर में मंगल ग्रह में बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं. नासा का Perseverance रोवर ही लगभग 2.7 बिलियन डॉलर्स का है और इसके बावजूद दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा कभी मंगल ग्रह पर नहीं जा पाएगा. (फोटो सोर्स यूट्यूब Fridays for future)
इस स्पूफ विज्ञापन में कुछ मंगल ग्रह के विजुएल्स के साथ बैकग्राउंड में एक आवाज सुनाई देती है - 'मानव प्रजाति के धरती पर 50 लाख साल बिताने के बाद अब समय आ गया है बदलाव का. मंगल ग्रह. 56 मिलियन स्क्वायर मील तक फैली धरती. खूबसूरत और मंत्रमुग्ध कर देने वाली जगहें. यहां पर ना युद्ध होगा और ना ही अपराध. ना ही यहां कोई महामारी होगी और ना ही प्रदूषण.' (फोटो क्रेडिट: Getty Images)
इस विज्ञापन में आगे कहा गया कि ये एक ऐसी जगह हो सकती है जहां से मानव सभ्यता नई शुरुआत कर सकती है. इसके बाद वीडियो क्लिप के अंत में एक मैसेज आता है- और बाकी बचे 99 प्रतिशत लोग जो धरती पर ही रहने वाले हैं, उन्हें जलवायु परिवर्तन की समस्या को ठीक कर लेना चाहिए. (फोटो क्रेडिट: Getty Images)
इस यूट्यूब वीडियो के साथ ही लिखा था कि मंगल ग्रह मिशन पूरी दुनिया में रफ्तार पकड़ रहे हैं. साल 2020 में ही नासा ने एक रोवर मंगल ग्रह के लिए भेजा है. यूएई ने होप ऑर्बीटर लॉन्च किया है, इसके अलावा चीन ने भी एक ऑर्बिटर और एक रोवर को लॉन्च किया है जो मंगल ग्रह पर 2021 में पहुंच रहे हैं. इसके अलावा इलॉन मस्क भी कह चुके हैं कि साल 2026 तक उनकी कंपनी स्पेस एक्स मंगल ग्रह पर लोगों को भेजने में कामयाब होगी. (फोटो सोर्स यूट्यूब Fridays for future)