भारत और चीन के बीच वैसे तो सीमा पर अभी भी तनाव बरकरार है लेकिन इस साल दोनों देशों में कुछ ऐसा भी हुआ जिसमें एक समानता है. दरअसल, इन दोनों देशों में इस साल गर्मी ने हर रिकॉर्ड तोड़ दिया. जलवायु परिवर्तन की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में चीन और भारत सबसे आगे हैं क्योंकि यहां की जनसंख्या दूसरे देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा है.
दुनियाभर में गर्मी के कारण होने वाली मौत का आकंड़ा साल 2000 के मुकाबले 2018 में 54 फीसदी तक बढ़ चुका है. 2018 में हीट वेव के कारण 65 साल से ज्यादा उम्र के करीब 2 लाख 96 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें सबसे ज्यादा मौत चीन और भारत में हुई हैं. चीन में हीट वेव की वजह से 62 हजार लोगों की जान गई है जबकि भारत में 31 हजार लोगों की मौत हुई है. यह दूसरे सभी देशों से काफी ज्यादा है.
इतना ही नहीं, अत्यधिक हीट वेब की वजह से बीते साल करीब 30 हजार 200 करोड़ काम के घंटे बर्बाद हो गए. गर्म होती दुनिया के खतरे इसी वजह से बढ़ते जा रहे हैं. ज्यादा गर्मी की वजह से मुख्य तौर पर कृषि पर आधारित भारत में फसलों की भारी बर्बादी हुई और उत्पादकता पर इसका नकारात्मक असर पड़ा.
गर्मी का आलम ये है कि अब तक सर्बिया का जो वर्कहोयांस्क गांव दुनिया भर में सबसे ज्यादा सर्दी पड़ने के लिए जाना था अब वहां गर्मी ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है. पहले इस गांव में पारा -67.8 डिग्री तक पहुंच जाता था. लेकिन अब इसी गांव में गर्मी ने भी रिकॉर्ड बनाया है.
बीते जून इस गांव ने उल्टा रिकॉर्ड बनाया और यहां पारा 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जिसने लोगों को चौका दिया. यह गांव आर्कटिक के उत्तरी क्षेत्र का सबसे गर्म इलाका बन गया. इस गांव में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बीते कुछ सालों में 100 डिग्री तक का अंतर आ गया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है.