भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 की शाम को निधन हो गया. एक ऐसे राजनेता थे, जिनके फैसलों ने देश को एक अलग दिशा और दशा प्रदान की. उनके फैसलों के लिए हमेशा देश उन्हें याद करेगा.
02 मार्च 2006 को ली गई इस तस्वीर में, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (बाएं) और भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक करने से पहले एक दूसरे के बगल में खड़े हैं. अमेरिकी सीनेट ने 16 नवंबर 2006 को भारत के साथ एक ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौता पारित किया, एक साल से अधिक समय बाद इसे दोनों देशों के नेताओं ने संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में प्रस्तावित किया था(रवींद्रन द्वारा फोटो/एएफपी फ़ाइलें/एएफपी)
वैसे तो उन्होंने कई ऐसे फैसले देश हित में लिए, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. लेकिन 2008 में तमाम विरोधों और आर्थिक मंदी के बावजूद परमाणु समझौते को लेकर जो फैसला उन्होंने लिया, वो उनके उस दृढ़ निश्चयी स्वभाव को दिखाता है, जो देश को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए काम आया.
तस्वीर में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश नई दिल्ली में भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के साथ हाथ मिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं. (फोटो - इंडिया टुडे )
भारत के चौदहवें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एक राजनीतिज्ञ होने के साथ ही विद्वान और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ थे. उनकी पहचान उनकी विनम्रता, शांत स्वभाव, बहुत कम बोलना, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता और कर्मठता थी.
इस हैंडआउट तस्वीर में, पाकिस्तान के पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री मुहम्मद शाहबाज़ शरीफ (बाएं) 12 दिसंबर, 2013 को नई दिल्ली में भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से मिलते हुए. (फोटो- एएफपी फोटो/पीआईबी)
वित्त मंत्री के रूप में उनके अर्थशास्त्र के ज्ञान ने ही भारत को उदारवादी आर्थिक सुधार की दिशा में मजबूती प्रदान की. उन्होंने अपनी पुस्तक 'भारत में निर्यात और आत्मनिर्भरता और विकास की संभावनाएं' में भारत में निर्यात आधारित व्यापार नीति की आलोचना की थी.
तस्वीर 20 मई, 2008 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह की है. इसमें भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (दाएं) ब्रुनेई दारुस्सलाम के सुल्तान हाजी हसनल बोल्किया (बीच में) से हाथ मिलाते हुए. भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल (बाएं) उन्हें देखती हुई. (फोटो: प्रकाश सिंह/एएफपी)
1971 में डॉ. सिंह ने वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवा दी. 1972 में उनकी नियुक्ति वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में हुई. डॉ. सिंह ने वित्त मंत्रालय के सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री के सलाहकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया.
तस्वीर में मैक्सिकन राष्ट्रपति फेलिप काल्डेरोन (दाएं) 18 जून, 2012 को लॉस काबोस, बाजा कैलिफोर्निया, मैक्सिको में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के उद्घाटन से पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का स्वागत करते हुए. (फोटो -क्रिस बौरोनकल/एएफपी)
डॉ सिंह ने 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया जो स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक समय था. आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक नीति के निर्धारण में उनकी भूमिका को सभी ने सराहा है. भारत में इन वर्षों को डॉ. सिंह के व्यक्तित्व के अभिन्न अंग के रूप में जाना जाता है.
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (दाएं) और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे 14 दिसंबर 2006 को टोक्यो में प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास पर आयोजित स्वागत समारोह के दौरान सम्मान गार्ड की अगुआई में. सिंह 13 दिसंबर को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जापान पहुंचे थे. (फोटो -तोशीयुकी आइजावा/पूल/एएफपी)
अपने राजनीतिक जीवन में डॉ. सिंह 1991 से भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्य सभा) के सदस्य रहे. वहां वे 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता थे. डॉ. मनमोहन सिंह ने 2004 के आम चुनाव के बाद 22 मई 2004 को प्रधानमंत्री के रूप के शपथ ली और 22 मई 2009 को दूसरी बार प्रधानमंत्री बने.
तस्वीर में डॉ. मनमोहन सिंह दिल्ली स्थित अपनेकार्यालय में बैठे हुए. (फोटो - इंडिया टुडे)
जब मनमोहन सिंह ने 1991 में वित्त मंत्री का पद संभाला तो भारत गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा था. उस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार कम था, जो मुश्किल से दो सप्ताह के आयात के लिए था. तब देश को साहसिक सुधारों की आवश्यकता थी और नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के जिम्मे ये काम था. दोनों ने सुधार की दिशा में कई कदम उठाए. सिंह ने लाइसेंस राज को खत्म किया और अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोल दिया. (फोटो - इंडिया टुडे)
मनमोहन सिंह ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने का भी एक मजबूत फैसला लिया. मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 18 जुलाई, 2005 को समझौते की रूपरेखा पर एक संयुक्त घोषणा की और यह औपचारिक रूप से अक्टूबर 2008 में लागू हुआ. यह भारत के लिए एक बड़ी जीत थी. (फोटो - इंडिया टुडे)
परमाणु समझौते पर सिंह ने जो सख्त रुख अपनाया, इसने भारत और अमेरिका को एक-दूसरे के करीब लाने में भी मदद की. इस फैसले के कारण उनकी यूपीए सरकार को विश्वास परीक्षण जैसे दौर से भी गुजरना पड़ा. देश के कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था.
ये तस्वीर 12 सितंबर, 2019 को नई दिल्ली में हेड क्वार्टर में कांग्रेस की बैठक में मनमोहन सिंह, एके एंटनी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. ( फोटो: चंद्रदीप कुमार)
इस समझौते के लिए उन्हें अपने ही गठबंधन के कई दलों को मनाना पड़ा. तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मदद से डॉ. सिंह कुछ दलों को मनाने में सफल रहे जिन्होंने परमाणु समझौते का विरोध करना छोड़ दिया.
इस तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ नई दिल्ली में. (फोटो - इंडिया टुडे)
हालांकि, वामपंथी दलों ने इस डील का पुरजोर विरोध किया और सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. समाजवादी पार्टी ने पहले वाम मोर्चे का समर्थन किया था, लेकिन बाद में उसने अपना रुख बदल लिया. सिंह की सरकार को विश्वास की परीक्षा से गुजरना पड़ा.
तस्वीर में एक पार्टी समारोह में शीला दीक्षित के साथ बैठे मनमोहन सिंह. (फोटो - इंडिया टुडे)
उन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी के दौरान देश को आगे बढ़ाया, इसका फायदा उन्हें 2009 के लोकसभा चुनाव में मिला और एक बार फिर UPA की सरकार आ गई.प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना, मनरेगा और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम लागू किया गया.
इस तस्वीर में 65वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: शेखर यादव/इंडिया टुडे ग्रुप)
संजय बारू ने अपनी 2015 की किताब, 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर: द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह' में लिखा, 'परमाणु समझौते पर उनके द्वारा अपनाए गए रुख ने सोनिया गांधी के प्रति उनकी अधीनता की याद को लोगों की सोच में मिटा दिया. अंत में मनमोहन सिंह राजा थे.' बारू ने इस डील को 'सिंह का सर्वोच्च गौरव' बताया. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में 206 सीटें जीतीं.
तस्वीर में मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी. (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप)
मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त के एक गांव में हुआ था. डॉ. सिंह और की शादी गुरशरण कौर से हुई थी. इनकी तीन बेटियां हैं. डॉ. सिंह ने वर्ष 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की शिक्षा पूरी की.
तस्वीर में सतीश धवन, एपीजे अब्दुल कलाम, मनमोहन सिंह एक बैठक में. (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप)
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की. 1957 में उन्होंने अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी से ऑनर्स की डिग्री अर्जित की. इसके बाद 1962 में उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नूफिल्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल किया.
तस्वीर में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और अन्य कांग्रेस नेता प्रेस से बात करते हुए. (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप)
पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में डॉ. सिंह ने शिक्षक के रूप में भी कार्य किया जो उनकी अकादमिक श्रेष्ठता दिखाता है. इसी बीच में कुछ वर्षों के लिए उन्होंने यूएनसीटीएडी सचिवालय के लिए भी कार्य किया. इसी के आधार पर उन्हें 1987 और 1990 में जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया.
तस्वीर में मुरली देवड़ा को सुनते हुए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप)
डॉ. सिंह को मिले कई पुरस्कारों और सम्मानों में सबसे प्रमुख सम्मान हैं – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण(1987), भारतीय विज्ञान कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार (1995), वर्ष के वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी अवार्ड (1993 और 1994), वर्ष के वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी अवार्ड (1993), कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1956) का एडम स्मिथ पुरस्कार से नवाजा गया.
तस्वीर में 30 सितंबर 2017 को नई दिल्ली में दशहरा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मनमोहन सिंह और अन्य भाजपा नेताओं के साथ. (फोटो: चंद्रदीप कुमार/ इंडिया टुडे ग्रुप)
मनमोहन सिंह को कैम्ब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राइट पुरस्कार (1955) भी मिला था. डॉ. सिंह को जापानी निहोन किजई शिम्बुन एवं अन्य संघों द्वारा भी सम्मानित किया गया था. उन्हें कैंब्रिज एवं ऑक्सफोर्ड तथा अन्य कई विश्वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियां प्रदान की गई थीं.
फोटो में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, एनसीपी नेता शरद पवार, शरद चंद्र गोविंदराव पवार, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी और अन्य लोगों के साथ नई दिल्ली, भारत में यूपीए-2 सरकार की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर. (फोटो - इंडिया टुडे)
डॉ. सिंह ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने 1993 में साइप्रस में राष्ट्रमंडल प्रमुखों की बैठक में और वियना में मानवाधिकार पर हुए विश्व सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था.
फोटो में कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर (बाएं) 6 नवंबर, 2012 को नई दिल्ली में समझौतों पर हस्ताक्षर समारोह के बाद मीडिया से बात करते हुए, साथ में भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह . दोनों देशों के बीच हुए समझौते के परिणामस्वरूप, कनाडाई कंपनियां पहली बार भारत को यूरेनियम और परमाणु रिएक्टर निर्यात करने में सक्षम हुई. (फोटो - रॉयटर्स )