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सरपंच जमीन पर-आराध्य कुर्सी पर, राम-भरत शैली में चलेगा पंचायत राज

aajtak.in
  • 29 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST
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राजस्थान के पंचायत चुनाव में दो सरपंचों ने एक अजब ही काम क‍िया है. उन्होंने एक अनूठी परंपरा की शुरुआत की है जिसमें सरपंच की कुर्सी पर यह खुद नहीं बैठे, बल्क‍ि अपने आराध्य की तस्वीर रखकर सरपंची शुरू की. अब वह पूरे पांच साल जमीन पर बैठकर ग्राम पंचायत का काम देखेंगे. इस काम से ऐसा लग रहा है क‍ि यहां राम-भरत शैली में शासन चलेगा. यह अनूठा काम राजस्थान में स‍िरोही ज‍िले की दो पंचायतों में हुआ है.

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राजस्थान के सिरोही जिले की रेवदर ग्राम पंचायत के युवा सरपंच अजबराम और उड़वारिया ग्राम पंचायत के नव निर्वाचित सरपंच जैताराम ने निर्वाचित होते ही यह संकल्प लिया है कि अब वो अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान पंचायत कार्यालय में रखी सरपंच की कुर्सी पर न बैठकर जमीन पर ही बैठेंगे. इन दोनों के इस तरीके को देखकर पौराणिक काल में दशरथ पुत्रों राम-भरत की कहानी याद आ जाती है, जब राम के वनवास जाने पर भरत ने अयोध्या के सिंहासन पर राम की खड़ाऊं रखकर शासन चलाया था.

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इस संकल्प के स्वरूप दोनों ने अलग-अलग अपने आराध्य की तस्वीर सरपंच कुर्सी पर स्थापित कर दी है और उनका बाकायदा पूजा पाठ भी किया है.

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रेवदर सरपंच अजबराम कहते हैं कि उनका यह संकल्प इसलिए है कि कुर्सी पर बैठ कर विशेष होने का अहंकार खुद पर साबित न हो और जमीन पर सभी पंचायत सदस्यों और  ग्रामवासियो के साथ बैठ कर जमीन से ही जुड़ा रह सकूं. यही उद्देश्य है इस  संकल्प के पीछे.

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इसी तरह उड़वारिया सरपंच कहते है कि उन्होंने अपने ब्रह्मलीन गुरु की तस्वीर सरपंच की कुर्सी पर रखी है. उनकी प्रेरणा से यह संकल्प लिया है कि सबको समान रूप से देखूंगा और जमीन पर बैठ कर जमीन से जुड़ा रहूंगा.

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बता दें क‍ि राजस्थान के पंचायती चुनाव में 17 और 22 जनवरी को दो चरणों के चुनाव में मतदाताओं ने भारी जोश के साथ मतदान किया था. पहले चरण में जहां 81.51 प्रतिशत मतदाताओं ने तो दूसरे चरण में 82.78 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया. बुधवार 29 जनवरी को तीसरे चरण में 49 पंचायत समितियों की 1700 ग्राम पंचायतों के 17,516 वार्डों में मतदान हो रहा है.

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