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इसरो ने अंतिम वक्त में टाल दी जीसैट-1 की लॉन्चिंग, ये है कारण

नागार्जुन
  • 04 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST
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पृथ्वी की निगरानी करने वाले देश के पहले अत्याधुनिक उपग्रह जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1 (जीसैट-1) की 5 मार्च को होने वाली लॉन्चिंग को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने फिलहाल टाल दिया है. लॉन्चिंग टालने का मुख्य कारण तकनीकी समस्या बताई जा रही है. इसरो की तरफ से कहा गया है कि सैटेलाइट लॉन्चिंग की नई तारीख जल्द ही बताई जाएगी.

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बता दें कि इससे पहले सैटेलाइट को भू-स्थिर कक्षा में स्थापित करने के लिए उल्टी गिनती बुधवार दोपहर 3.43 बजे शुरू करने की जानकारी दी गई थी. इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.

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अगर 5 मार्च को इस सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग हो जाती तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर इतिहास रच देता. जीसैट-1 का वजन 2,268 किलोग्राम है. इसे तीन चरणों के जियो-सिनक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकिल (जीएसएलवी-एफ10) से प्रक्षेपित किया जाना है.

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, 51.70 मीटर लंबे और 420 टन वजनी जीएसएलवी-एफ10 रॉकेट से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाना था.

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इसके प्रक्षेपण को लेकर बताया गया था कि 18 मिनट बाद जीएसएलवी रॉकेट जीसैट-1 को पहले जियो सिन्क्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में पहुंचाएगा. जीटीओ से उसके बाद उपग्रह को जियो स्टेशनरी आर्बिट में ले जाएगा. जियोस्टेशनरी कक्षा (पृथ्वी से 36,000 किमी ऊपर) में एक उपग्रह का आर्बिटल अवधि, पृथ्वी के रोटेशनल अवधि के बराबर होती है.

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