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'हम 33 लोग जिंदा है...', किसी चमत्कार से कम नहीं हैं दुनिया की ये 5 घटनाएं!

Shilpa
  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST
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किसी दुखद घटना के बाद ऐसा लगता है कि इसका शिकार बने लोग शायद ही जीवित बचे होंगे. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है, जब इंसान मौत को मात देकर वापस लौट आता है. आज हम कुछ ऐसी ही घटनाओं के बारे में बात करेंगे, जो किसी चमत्कार से कम नहीं थीं. 
 

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हाल की बात है, जब कोलंबिया के जंगलों में एक प्लेन क्रैश हो गया था. इसके बाद खोए चार बच्चे 40 दिन बाद भी जिंदा मिले. बच्चों की उम्र- 9, 4, 13 और 1 साल है. इनकी मां की हादसे में मौत हो गई. ये सेना के खोज अभियान में मिले. इनमें डिहाइड्रेशन और कीड़े काटने के निशान थे. लेकिन हालत ठीक थी. 
 

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13 अक्टूबर, 1972 में उरुग्वे के ओल्ड क्रिस्चन्स क्लब ऑफ मॉन्टेवीडियो के खिलाड़ी दूसरे देशों के साथ टूर्नामेंट खेलने के लिए चिली के सैंटिएगो जा रहे थे. लेकिन एंडीज में पहाड़ों पर उनका विमान क्रैश हो गया. बर्फीले पहाड़ों पर काफी खोज के बाद भी कुछ नहीं मिला, तो बचाव अभियान रोक दिया गया. 45 में से 12 लोग तुरंत मर गए थे. बाकी बर्फीले हादसे के बाद मरे. बाद में उसी साल दिसंबर में दो खालड़ियों ने मदद के लिए पैदल चलना शुरू किया. तब 14 और लोगों को बचा लिया गया. यहां विमान में हादसे के बाद फंसे लोग उसमें मौजूद खाना खा रहे थे. जब खाना खत्म हुआ तो जीवित रहने के लिए मरे हुए लोगों का मांस खाना शुरू कर दिया था.
 

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19 सितंबर, 1985 में मेक्सिको सिटी में 8.1 की तीव्रता का भूकंप आया था. इमारतें गिरने से हजारों लोगों की मौत हुई. सरकारी आंकड़ों में ये संख्या 3692 बताई गई. लेकिन असल संख्या 10 हजार तक मानी जाती है. कई दिनों की खोजबीन के बाद कई नवजात बच्चे जीवित मिले. इन बच्चों को मिरेकल बेबी कहा जाता है. इनमें से एक जीसस फ्रांन्सिस्को थे. उन्हें लिटिल मिरेकल भी कहा जाता है. वो भूकंप के वक्त अपनी मां के गर्भ में थे. उनकी दादी ने उन्हें भूकंप के दौरान ही उनकी मां के पेट को ब्लेड से काटकर निकाला था. इस हादसे में उनकी मां की मौत हो गई थी.
 

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5 अगस्त, 2005 को चिली के एटाकामा रेगिस्तान में एक कॉपर खदान में धंसने से 33 लोग 700 मीटर की गहराई में दब गए थे. इनके बचने की उम्मीद सबने लगभग खो दी थी. लेकिन फिर बचाव टीम को पता चला कि ये लोग ऐसी जगह पर हैं, जहां से इन्हें जीवित बाहर निकाला जा सकता है. 22 अगस्त को पता चला कि ये कहां हैं. उन्होंने नीचे से ही मैसेज भेजा कि 'हम 33 लोग शेल्टर में सुरक्षित हैं.' फिर बचाव दल ने ड्रिल मशीनों का इस्तेमाल किया और इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला. एक कैप्सूल भेजकर सभी को एक एक करके बाहर निकालने का प्लान था. फिर 69 दिनों बाद इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सका था.
 

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23 जून, 2018 में थाईलैंड के उत्तरी प्रांत चैंग राई में 12 बच्चे अपने फुटबॉल कोच के साथ एक गुफा में फंस गए. हुआ ये था कि ये सभी लोग सैर पर निकले थे. तभी बारिश शुरू हो गई. ये बचने के लिए वहां की मशहूर थैम लुगांग गुफा में चले गए. इनकी योजना केवल एक घंटे तक यहां रुकने की थी. इनके पास एक फ्लैश लाइट थी. तभी गुफा में पानी भर गया और ये लोग बाहर नहीं आ पाए. खुद को पानी से बचाने के लिए ये लोग गुफा के और भीतर चले गए थे. इन्होंने जीवित बचने के लिए वहां पत्थरों को तोड़ा और एक जगह बनाई. जो मेन द्वार से लगभग चार किलोमीटर अंदर थी. इन्हें बचाने के लिए दुनिया भर के केव डाइवर्स लाए गए. आखिरकार नौ दिनों के अंधेरे के बाद इन्हें बाहर निकालकर रोशनी में लाया गया.

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