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शहर के चौखट पर शिकार, पीछे रामनगर सामने बाघिन का गाय पर हमला

aajtak.in
  • 01 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 6:59 PM IST
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शहर भी जंगल ही है. कम से कम इस बाघिन के लिए तो है ही. वह भी तब जब उसे अपने शिकार क्षेत्र में कुछ खाने को न मिले. उत्तराखंड के रामनगर के पास जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के बाहर टेढ़ा गांव में एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ शिकार करने आई. किस्मत भी अच्छी थी. उसे एक गाय मिल गई. उसका शिकार हो गया. aajtak.in से ये एक्सक्लूसिव तस्वीरें शेयर की हैं वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर मुकेश यादव और अभिनव मल्होत्रा ने. (फोटोः अभिनव मल्होत्रा)

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पेशे ने टूरिज्म गाइड, चाइनीज लैग्वेज इंटरप्रेटर और टूर-ट्रैवल का काम करने वाले मुकेश यादव शौकिया वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं. अभिनव आईटी सेक्टर में काम करते हैं और मुकेश के साथ अक्सर जिम कॉर्बेट और उसके आसपास के जंगलों में बाघ-बाघिन की तस्वीरें लेने निकल जाते हैं. 30 अगस्त की सुबह इन दोनों वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स को ये अद्भुत नजारा मिला, जिसे ये अपने कैमरे में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाए. 

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हुआ यूं कि 30 अगस्त की सुबह 11 बजे एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ रामनगर की पीछे की तरफ टेढ़ा गांव में आई. उसे नदी किनारे ही कई गायें मिल गईं. टाइग्रेस ने एक गाय को अपना शिकार बनाया. उससे पहले अपने तीनों शावकों को शिकार घेरने और उसपर अचानक हमला करने का तरीका भी सिखाया. (फोटोः अभिनव मल्होत्रा)

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वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर मुकेश यादव ने आजतक से बातचीत में बताया कि स्थानीय लोग इस बाघिन को कनकटी कहते हैं. क्योंकि इसका एक कान कटा हुआ है. इसकी नाक भी कटी है. चेहरे पर काफी चोट के निशान हैं. इसके बावजूद यह इतनी सेहतमंद है कि किसी भी नर बाघ को टक्कर दे सकती है. इसके तीनों शावक 15 महीने के हैं. इन्हें रोज खाना चाहिए, इसलिए शिकार शहर के चौखट पर हो रहा है. (फोटोः मुकेश यादव)

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मुकेश दो दशकों से इस जंगल में फोटोग्राफी कर रहे हैं. वो कहते हैं कि टाइग्रेस कनकटी के शिकार का इलाका करीब 10 वर्ग किलोमीटर का है. वह एक हफ्ते अलग इलाके में रहती है. एक हफ्ते टेढ़ा गांव के आसपास रहती है. जैसे ही कोई शिकार मिलता है, उसपर हमला कर देती है. मुकेश और अभिनव बाघिन कनकटी को एक महीने से ट्रैक कर रहे थे. (फोटोः मुकेश यादव)

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मुकेश यादव ने बताया कि किसी भी शहर के ठीक बाहर और जंगल के मुहाने पर बाघिन के शिकार की ऐसी तस्वीर बेहद दुर्लभ होती है. इसके लिए काफी धैर्य और सही समय का इंतजार करना पड़ता है. किस्मत अच्छी थी कि टाइग्रेस के शिकार क्षेत्र में इकलौता गांव टेढ़ा गांव है और वह यहां पर शिकार करने आई. हम मौके पर थे तो हमें फोटो मिल गई. (फोटोः मुकेश यादव)

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मुकेश यादव दिल्ली के रहने वाले हैं. साथ ही चीनी भाषा के एक्सपर्ट हैं. वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में चार-पांच इंटरनेशनल अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. साल 2005 में बाघ के शिकार की स्टिल फोटोग्राफी सबसे पहले मैंने की थी. उसके लिए सेंचुरी एशिया वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी अवॉर्ड मिला है. (फोटोः अभिनव मल्होत्रा)

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बाघिन ने बहुत ही इत्मीनान से गाय को शिकार बनाया. शावकों को शिकार की टैक्टिस सिखाई. पेट भरने के बाद वापस जंगल में चली गई. लेकिन मुकेश ने बताया कि वह आसपास ही होगी. क्योंकि बचा हुआ मांस खाने वह फिर वापस आएगी. यहां के स्थानीय लोग कभी भी बाघ के शिकार को नहीं छूते. न ही उसे कोई नुकसान पहुंचाते हैं. इससे बाघों की संख्या यहां ठीक है. (फोटोः मुकेश यादव)

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