दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का पर्व मानाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन शंकर भगवान ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. इसी खुशी में देवाओं ने इस दिन स्वर्ग लोक में दीपक जलाकर जश्न मनाया था. इसके बाद से हर साल इस दिन को देव दिवाली के रुप में मनाया जाता है. इस दिन पूजा का विशेष महत्व होता है.
देव दिवाली का पर्व 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा. कहा जाता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं और इस एक दिन समस्त देवी-देवताओं को एक साथ प्रसन्न किया जा सकता है. इसके अलावा अगर आपको मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पानी है तो आज कुछ विशेष उपाय करने होंगे. आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में.
माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी पीपल के पेड़ पर ही निवास करती हैं. इसलिए आज के दिन जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाना चाहिए. इससे लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं.
इस दिन गरीबों को चावल दान करना चाहिए. चावल के दान से चंद्र ग्रह शुभ फल देता है. गरीब को चावल दान करने से मां लक्ष्मी भी अपनी कृपा बरसाती हैं.
कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर आप के पत्तों का तोरण बांधना भी शुभ माना जाता है.
इस दिन चंद्रमा के दुषप्रभाव से बचने के लिए बहुत संयम होकर पूजा करनी चाहिए और पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए.
पूर्णिमा के दिन चांद निकलने के बाद मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं.
शिवलिंग पर दूध, शहद और गंगाजल चढ़ाने से शंकर जी के साथ मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं.