अहम योजना की शुरुआत
कोरोना काल में बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हुए हैं. ऐसे लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम योजना की शुरुआत की है. इसका नाम आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं..
दो साल तक पीएफ देगी सरकार
आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत उन लोगों को भविष्य निधि (EPFO) से जोड़ा जाएगा जो अब तक रजिस्टर्ड नहीं थे. इस योजना के तहत ईपीएफओ से जुड़े कर्मचारियों को भविष्य निधि ( PF) फंड में दो साल तक पूरा 24 फीसदी हिस्सा सरकार देगी.
अभी का नियम क्या है
आपको यहां बता दें कि सामान्य नौकरीपेशा लोगों को पीएफ फंड में खुद 12 फीसदी का कंट्रीब्यूशन करना होता है. वहीं, बाकि के 12 फीसदी का सहयोग वो कंपनी देती है, जिसमें आप नौकरी कर रहे होते हैं. कहने का मतलब ये है कि सरकार की नई योजना में जो लोग EPFO से जुड़ेंगे उन्हें दो साल तक अपने पीएफ को लेकर कोई चिंता नहीं करनी होगी. ये पैसे सरकार खुद आपके पीएफ अकाउंट में डाल देगी.
कौन से लोग योजना से जुड़ेंगे?
इस योजना का फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनकी नौकरी कोरोना काल (1 मार्च से 30 सितंबर) के बीच गई होगी और 1 अक्टूबर या उसके बाद रोजगार मिला होगा. उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि प्रदीप एक कंपनी में नौकरी कर रहा था लेकिन लॉकडाउन के दौरान मई महीने में कंपनी ने उसकी छंटनी कर दी. अब प्रदीप को 5 अक्टूबर से नई नौकरी मिल गई है, तो वह अब सरकार की आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का लाभ ले सकेगा.
30 जून 2021 तक लागू
नई नौकरी में प्रदीप के कुल 24 फीसदी पीएफ का कंट्रीब्यूशन, कुल दो साल तक सरकार करेगी. हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी है कि प्रदीप की मासिक सैलरी 15 हजार रुपये या उससे कम हो. यह योजना 30 जून 2021 तक लागू रहेगी. मतलब ये कि अगर 30 जून तक कोई नई नौकरी ज्वाइन करता है तो वह शर्तों के साथ योजना के दायरे में आएगा.
कंपनी के लिए शर्तें
इसके लिए आधार का यूएएन नंबर से लिंक होना अनिवार्य है. इस योजना में कुछ शर्तें कंपनी के लिए भी है. सरकार कुल 24 फीसदी पीएफ कंट्रीब्यूशन वहां करेगी जिस कंपनी में 1 हजार कर्मचारी हैं. एक हजार से ज्यादा कर्मचारी वाली कंपनी में सरकार सिर्फ 12 फीसदी कर्मचारी का हिस्सा कंट्रीब्यूट करेगी.
ये कर्मचारी भी स्कीम के दायरे में
निर्मला सीतारमण के मुताबिक इस स्कीम में 15,000 से कम वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी भी शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था और वे एक अक्टूबर 2020 को या उसके बाद दोबारा जुड़े हैं. योजना के दायरे में ईपीएफओ के पास पंजीकृत प्रतिष्ठान आएंगे. नये कर्मचारियों का आकलन सितंबर 2020 की स्थिति से किया जाएगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए अधिकतम 50 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नई भर्तियां करनी होंगी, जबकि जिन प्रतिष्ठानों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम पांच नई नियुक्ति करनी होगी.