यदि आप अपने बैंक के अलावा किसी और दूसरे बैंक की ATM मशीन से भी पैसा निकालते हैं तो आपकी फिर आपकी जेब तंग होने वाली है. भारतीय रिजर्व बैंक ने ATM से कैश निकालने से लेकर बैलेंस इन्क्वायरी और पिन बदलने तक लगने वाली इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी कर दी है. तो आखिर क्या होती है ये इंटरचेंज फीस जिसने ATM ट्रांजैक्शन को महंगा कर दिया है. (All Photos : Getty)
इंटरचेंज फीस क्या होती है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है. मान लीजिए आपके पास SBI का कोई कार्ड है और आप उसका इस्तेमाल ICICI Bank की एटीएम मशीन पर करते हैं. इस स्थिति में ICICI Bank मर्चेंट बैंक हो गया और अपने मशीन पर कार्ड इस्तेमाल करने के लिए वह SBI से एक शुल्क वसूलता है. ये इंटरचेंज फीस कहलाती है. लेकिन ये आपके ट्रांजैक्शन को महंगा कैसे करती है?
अब आप ये सोच सकते हैं कि ये तो बैंकों का चार्ज है जो वो आपस में वसूलते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अभी बैंक अपने ग्राहकों को एक निश्चित सीमा तक दूसरे बैंक के एटीएम से पैसा निकालने या इंक्वायरी करने या पिन चेंज करने की सुविधा देते हैं. इस सीमा से ऊपर ऐसे लेनदेन करने पर ग्राहक को शुल्क देना होता है. मान लीजिए आपने अपनी लिमिट के बाद दूसरे बैंक के एटीएम से पैसा निकाला तो भले आप 500 रुपये निकाले या 5000 आपको ये इंटरचेंज फीस देना होगा, आगे जानें ये जेब पर कितना असर डालेगा.
भारतीय रिजर्व बैंक ने दूसरे बैंक के एटीएम से कैश निकालने का शुल्क 15 रुपये से बढ़ाकर 17 रुपये और बैलेंस इंक्वायरी या पिन चेंज का शुल्क 5 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये किया है. लेकिन ये राशि बैंकों के आपस में लेनदेन के लिए बढ़ाई गई है. इससे पहले इंटरचेंज फीस में बदलाव अगस्त 2012 में किया गया था. जबकि ग्राहकों को कितना शुल्क देना होगा इसके लिए आखिरी बार बदलाव अगस्त 2014 में किया गया था. तो अब आपको कितना शुल्क देना होगा?
अब आप सोच रहे होंगे इस इंटरचेंज फीस के बढ़ने से आपकी जेब पर कितना बोझ बढ़ने वाला है. तो घबराने की जरूरत नहीं है. अभी एक लिमिट के बाद दूसरे बैंक के एटीएम से ट्रांजैक्शन पर बैंक ग्राहक से मैक्सिमम 20 रुपये का शुल्क वसूल सकते हैं. आरबीआई ने ये लिमिट तय की गई है. अब इसे बढ़ाकर बस 21 रुपये किया गया है. लेकिन क्या ये 21 रुपये कल से ही लगने लगेंगे?
रिजर्व बैंक ने अपने सर्कुलर में साफ किया है कि बैंक आपस में लिए जाने वाले इंटरचेंज फीस को इसी साल अगस्त से बढ़ा सकते हैं. लेकिन ग्राहकों से वसूला जाने वाला 21 रुपये का शुल्क अगले साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी 2022 से पहले नहीं बढ़ाया जा सकेगा. उसके बाद ही आपकी जेब पर ये एक रुपये का बोझ बढ़ेगा. तो क्या इसके बाद फ्री ट्रांजैक्शन बंद हो जाएंगे.
अभी बैंक के ग्राहकों को अपने खुद के बैंक के एटीएम से एक महीने में कुल 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन मिलते हैं. इसमें कैश निकालने से लेकर बैलेंस इंक्वायरी करना भी शामिल है. जबकि ग्राहकों को दूसरे बैंक के एटीएम से मेट्रो शहरों में 3 और नॉन-मेट्रो शहरों में 5 लेनदेन की सुविधा मिलती है. शुल्क बढ़ने के बाद भी ग्राहकों को ये सुविधा मिलती रहेगी. यानी आपके इन ट्रांजैक्शन की लिमिट खत्म होने के बाद आपको 21 रुपये का शुल्क देना होगा.