शुरुआती दिनों में जगदीप टीन के कारखाने में काम करके अपना खर्चा-पानी चलाते थे. जगदीप ने एक इंटरव्यू में बताया था- 'एक दिन अचानक सड़क पर एक आदमी मिला उसने मुझे कहा कि फिल्म में काम करोगे. तो मैंने कहा कि वो क्या काम है, क्योंकि मैंने कभी फिल्में देखी ही नहीं.'
'तो उस आदमी ने कहा कि फिल्म में आपको एक्ट करना है तो मैंने कहा कि कितने पैसे मिलेंगे, तो उन्होंने कहा कि 3 रुपये. इस पर मैंने उन्हें कहा कि चलो अभी चलो. तो उन्होंने कहा कि कल आऊंगा.'
'मेरी मां बुर्का पहनती थी. तो वो मेरे साथ गईं. बीआर चोपड़ा की फिल्म थी, अफसाना. तो वहां बच्चों का ड्रामा हो रहा था और ऑडियंस में नीचे बैठकर बच्चे ड्रामा देख रहे थे. जो बच्चे ड्रामा देख रहे थे उनमें मैं भी था.'
जगदीप ने बताया, 'तो उसमें एक डायलॉग उर्दू का आ गया और उर्दू मेरी जुबान थी. वहां कुछ गुजराती और कुछ महाराष्ट्रीयन लोग थे, उनसे वो नहीं हो रहा था. फिर कहा कि कोई उर्दू बोलने वाला है, तो मैंने पड़ोसी बच्चे से पूछा अगर मैं उर्दू बोलूंगा तो क्या होगा, तो उसने कहा कि 3 रुपये के 6 रुपये हो जाएंगे. तो मैंने हाथ उठा दिया. उस वक्त यश चोपड़ा असिस्टेंट डायरेक्टर थे. तो मैंने तुरंत डायलॉग बोलकर सुना दिया. तो फिर बस वहीं से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ.'
'उसके बाद सभी सप्लायर्स को पता चला कि ये अच्छा आर्टिस्ट है, तो मुझे काम मिलने लगा. पैसे मिलने लगे. यहां तक कि मुझे एक बड़ी फिल्म भी मिली, उसमें मैंने किशोर कुमार के बचपन का रोल प्ले किया.'
'उसमें मेरा रोने का रोल था. तो मेकिंग के समय जब बिमल रॉय ने वो फिल्म
देखी तो उन्होंने कहा कि ये लड़का मुझे मेरी फिल्म के लिए चाहिए. मैं ऑफिस
में गया, बिमल दादा ने 300 रुपये देने के लिए कहा. मैं तैयार हो गया. दो
बीघा जमीन बहुत ही खूबसूरत फिल्म थी.'