वैक्सीन ट्रायल पर कई देशों को भरोसा है कि उनकी वैक्सीन कोरोना वायरस पर कारगर असर दिखाएगी. रूस के बाद अब चीन भी अपनी वैक्सीन के बारे में खुलकर दावा करने लगा है. चीन की सिनोवैक बायोटेक कंपनी ने अपनी वैक्सीन के मिड स्टेज ट्रायल के शुरूआती नतीजे जारी किए हैं. कंपनी का कहना है कि ये वैक्सीन बुजुर्गों पर सुरक्षित साबित हुई है.
हालांकि सिनोवैक बायोटेक की तरफ इस बात की भी चिंता जताई गई है कि ये वैक्सीन युवाओं की तुलना बुजुर्गों के इम्यून रिस्पॉन्स पर थोड़ा कम असर करती दिखाई दे रही है. बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बात की आशंका है कि ये प्रायोगिक वैक्सीन उन्हें पूरी तरह से सुरक्षा दे पाएगी या नहीं.
सिनोवैक कपंनी के मीडिया प्रभारी लिउ पेइचेंग ने रॉटर्स को बताया कि वैक्सीन के पहले और दूसर चरण के ट्रायल में किसी तरह के गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए. इस वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल संयुक्त रूप से मई के महीने में शुरू हुए थे, जिसमें कम से कम 60 साल तक के 421 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था. इस ट्रायल के पूरे नतीजे अभी कहीं प्रकाशित नहीं हुए हैं.
सिनोवैक बायोटेक की वैक्सीन कोरोनावैक इन वॉलंटियर्स के तीन समूहों में दी गई. एक समूह को वैक्सीन की दो कम डोज, दूसरे समूह को थोड़ी ज्यादा जबकि तीसरे को सबसे ज्यादा डोज दी गई. इनमें से 90 फीसदी से भी ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया. हालांकि, युवाओं की तुलना में एंटीबॉडी का ये स्तर बुजुर्गों में कम पाया गया.
कोरोनावैक वैक्सीन के अंतिम चरण का ह्यूमन ट्रायल ब्राजील और इंडोनेशिया में जारी है. इसके सुरक्षित और कारगर साबित होने पर आम लोगों के इस्तेमाल के लिए इसकी रेगुलेटरी मंजूरी लेने की कोशिश की जाएगी. हालांकि, चीन में ये वैक्सीन इमरजेंसी स्कीम के तहत पहले से ही हजारो लोगों को दी जा रही है.
सिनोवैक कंपनी के 90 फीसदी कर्मचारियों और उनके परिवारों ने इमरजेंसी स्कीम के तहत ये वैक्सीन लगवाई है. इस स्कीम का मकसद लोगों को दूसरी लहर के संक्रमण से बचाना है.
कोरोनावैक के तीसरे चरण का ट्रायल जारी है और वैक्सीन की इमरजेंसी स्कीम भी इसी ट्रायल की हिस्सा है. कंपनी के सीईओ यिन वेइडोंग ने रॉयटर्स को बताया कि ये वैक्सीन लगभग 2000 से 3000 कर्मचारियों और उनके परिवारों को वॉलंटरी आधार पर दी गई है.
लिउ पेइचेंग ने कहा कि इस संभावित वैक्सीन को तीन साल तक स्टोरेज में रखा जा सकता है. इससे उन क्षेत्रों में वैक्सीन देने में आसानी होगी जहां कोल्ड-चेन स्टोरेज की सुविधा नहीं है. आपको बता दें कि इस समय दुनिया की 8 वैक्सीन अपने तीसरे चरण के ट्रायल मे हैं जिनमें से चार वैक्सीन चीन के ही हैं.