भारत में रोजाना सामने वाले कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं. पिछले एक सप्ताह से हर दिन तीन लाख से ज्यादा कोरोना केस सामने आ रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में पहली बार कोरोना से तीन हजार से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं. मौत के इन नए आंकड़ों के साथ भारत में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर दो लाख को पार कर चुकी है. विशेषज्ञ मामलों में वृद्धि के लिए हर स्तर पर लापरवाही को जिम्मेदार बता रहे हैं.
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कोरोना की दूसरी लहर के चलते भारत का स्वास्थ्य ढांचा चरमरा चुका है. लेकिन असली डर मई को लेकर है. माना जा रहा है कि मई में कोरोना की दूसरी लहर का पीक होगा. अमेरिका में मिशिगन यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ भ्रामर मुखर्जी ने कोरोना की स्थिति को लेकर आगाह किया है. उनका कहना है कि मध्य मई के दौरान रोजाना 8-10 लाख केस सामने आ सकते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि 23 मई के आसपास रोजाना 4,500 लोग कोरोना से जान गंवा सकते हैं.
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एक अप्रैल से रोजाना मामलों की संख्या तेज गति से बढ़ रही है. क्या यह अधिक संक्रामक वेरिएंट के अलावा कोई और कारण हो सकता है? प्रोफेसर भ्रामर मुखर्जी ने 'द हिंदू' से कहा कि हमें सतर्क रहना होगा. उन्होंने कहा कि हम सब इस बात पर सहमत हैं कि भारत में अभी जो हालात हैं उसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं. जब पूरे देश को खोला गया तो उचित कोरोना बर्ताव की कमी, बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां, धार्मिक आयोजन, क्रिकेट मैच, सार्वजनिक परिवहन, मॉल, थियटर इन सबका योगदान रहा है जहां लोग बेरोकटोक जुटे.
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भ्रामर मुखर्जी ने कहा कि हम सब इस गफलत में आ गए थे कि अब हम सुरक्षित हैं. हम इस गलतफहमी में थे कि हमने कोरोना को मात दे दी. हम इस कपटी वायरस के खतरे का अनुमान लगाने में विफल रहे. हमने इसे जंगल में आग की तरह फैलने दिया. यहां तक कि जब फरवरी में इसका असर दिखने लगा तभी हमने सच्चाई से नजर चुराने की कोशिश की. जब इसकी रफ्तार धीमी थी तो हम वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ा नहीं सके.
मिशिगन यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ ने कहा कि ये सभी वो कारक है जिससे भारत में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े. हमने देखा कि मामले 8 गुना तेजी से बढ़े. कोरोना से होने वाली मौतें 9 गुना तेजी से बढ़ी हैं. प्रोफेसर भ्रामर मुखर्जी ने कहा, 'हमारे पास अभी विभिन्न भारतीय राज्यों के आंकड़े हैं जो दिखाते हैं कि डबल म्यूटेंट या यूके वेरिएंट उदाहरण के लिए महाराष्ट्र या पंजाब में जल्दी प्रभावी हो गए हैं. हालांकि सही भौगोलिक सिक्वेंसिंग, टाइम और एपिडेमियोलॉजिकल जांच के बिना यह सबूत अब भी परिस्थितिजन्य हैं.'
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अगर नए वेरिएंट के चलते संक्रमण हो रहा है तो 1 अप्रैल से ही क्यों केस तेजी से बढ़े हैं? इस सवाल पर प्रोफेसर भ्रामर मुखर्जी ने कहा कि यह इस वायरस की प्रकृति है. यह गुपचुप तरीके से विस्तार करता है और खगोलीय रूप से विस्फोट करता है. वृद्धि का दर पैरामीटर चौंकाने वाला है, लेकिन पैटर्न की व्याख्या की जा सकती है. उदाहरण के लिए अमेरिका और ब्रिटेन में ये देखा गया. 1918 इन्फ्लुएंजा महामारी के दौरान भारत में यही पैटर्न देखा गया.
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उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में कोरोना मामलों को लेकर प्रोफेसर ने कहा, मैं यह दोहराना चाहूंगी कि सच्चाई को दबाने या गलत संख्या पेश करने से कोई मदद नहीं मिलेगी. यह रणनीति विवेकपूर्ण नीति निर्धारण में बाधा डालती है, सही स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों या ऑक्सीजन की आपूर्ति, आईसीयू बेड की स्थिति में सुधार करने में बाधक है. यह महामारी भ्रामक नीति महामारी में बदल गई है क्योंकि आंकड़ों को सही तरीके से पेश नहीं किया जा रहा है.
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उत्तर प्रदेश में कोरोना का खतरा ज्यादा होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सिर्फ यूपी में ही नहीं, पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली भी अलर्ट लिस्ट में है. इसके बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात और कर्नाटक की बारी आती है. केरल की स्थिति फिर चिंताजनक हो रही है. मुझे लगता है कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल को लॉकडाउन की आवश्यकता होगी. ओडिशा और असम में भी संक्रमण दर तेज है लेकिन कुल मामलों की अनुमानित संख्या कम है.
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का पीक कब होगा और रोजाना कितने मामले आएंगे? इस पर प्रोफेसर भ्रामर मुखर्जी ने कहा ने कहा कि सभी का अनुमान है कि मई में कोरोना की दूसरी लहर का भारत में पीक होगा. हमारा अनुमान है कि कोरोना संक्रमण का मई मध्य तक पीक होगा. हमारा अनुमान है कि उस समय रोजाना 8-10 लाख केस आएंगे जबकि हर दिन 4500 लोगों की जान जा सकती है.
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क्या आप भारत में तीसरी लहर की उम्मीद करती हैं? क्या हम तीसरी लहर को रोकने के लिए आवश्यक दैनिक टीकाकरण के लक्ष्य के आसपास पहुंच पाएंगे? प्रोफेसर भ्रामर मुखर्जी ने कहा ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितनी तेजी से टीकाकरण करते हैं. हमें रोजाना 1 करोड़ लोगों के वैक्सीनेशन की जरूरत है. 80 करोड़ लोगों के टीकाकरण में 5 महीने लग सकते हैं.
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भ्रामर मुखर्जी का कहना है कि बहुत मुमकिन है कि यह अंतिम लहर नहीं हो. यह कोई अंतिम वेरिएंट नहीं होगा जो हम अभी देख रहे हैं. हमें एक दुरुस्त हेल्थ सिस्टम तैयार करने की जरूरत है. हमें डेटा, विज्ञान और मानवता द्वारा संचालित इस स्थिति से निपटने के लिए एक चुस्त सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता है. हमें स्वास्थ्य सेवा क्षमता, ऑक्सीजन आपूर्ति, आईसीयू बेड का निर्माण जारी रखना होगा.
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भ्रामर मुखर्जी के मुताबिक तैयारी और अनुमान कोरोना रोकथाम की कुंजी है. हमने टीकाकरण की सुस्त शुरुआत की है. उम्मीद है नई नीतियों के साथ हम गर्मियों तक वैक्सीनेशन बढ़ा सकते हैं.
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