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कोरोना के मरीजों को क्यों नहीं लगाई जाती है वैक्सीन, जल्दबाजी के हैं ये खतरे

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2021,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST
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कोरोना के मरीजों को वैक्सीन कब लगवानी चाहिए, इस पर कई तरह की स्टडीज आ चुकी है. भारत में टीकाकरण पर बनाई गई राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने भी वैक्सीन लगवाने के समय को लेकर कई सिफारिशें की हैं. NTAGI ने अपनी नई सिफारिश में कहा है कि कोविशील्ड की दो डोज के बीच के अंतर को बढ़ाकर 12-16 सप्ताह किया जाना चाहिए. इसके अलावा, कोरोना पॉजिटिव हुए लोगों को रिकवरी के 6 महीने के बाद वैक्सीन लगाई जाए. हालांकि, कोवैक्सीन के मामले में इस तरह के कोई बदलाव नहीं किए गए हैं. 

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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने सबसे पहले कोविशील्ड की पहली और दूसरी डोज के बीच 4-6 सप्ताह का अंतर जबकि कोवैक्सीन की पहली डोज के बाद 28 दिन के बाद दूसरी डोज लेने की इजाजत दी थी. कुछ दिनों के बाद कोविशील्ड के लिए दूसरी डोज का अंतर 4-8 सप्ताह और कोवैक्सीन के लिए 4-6 सप्ताह तक बढ़ा दिया गया. अप्रैल के महीने में केंद्र सरकार ने सलाह दी कि कोविशील्ड की दूसरी डोज पहली डोज के 6-8 सप्ताह बाद लगवानी चाहिए.
 

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आइए जानते हैं कि कोरोना संक्रमितों को वैक्सीन लगवाने के लिए क्यों मना किया जाता है और दुनिया भर के एक्सपर्ट्स दो डोज के बीच ज्यादा अंतर रखने की सलाह आखिर क्यों दे रहे हैं.
 

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अगर आपने वैक्सीन नहीं लगवाई है और कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो क्या करें- अमेरिका के CDC के मुताबिक अगर किसी ने वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगवाई है और वो संक्रमित हो जाता है तो उसे लक्षण दिखने के बाद से कम से कम 90 दिनों तक का इंतजार करना चाहिए. वहीं वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गगनदीप कांग का कहना है कि UK के डेटा से पता चलता है कि SARS-CoV-2 इंफेक्शन से बनी एंडीबॉडी 80 फीसदी तक सुरक्षा देती है. डॉक्टर गगनदीप का कहना है कि संक्रमित होने के बाद वैक्सीन लेने के लिए छह महीने तक इंतजार करना ठीक है.
 

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आंकड़ों की समीक्षा के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी यही सलाह है. WHO का कहना है कि नेचुरल इंफेक्शन के बाद वैक्सीनेशन को 6 महीने तक टाल देना चाहिए क्योंकि इंफेक्शन से बनी नेचुरल एंटीबॉडीज शरीर में इतने दिनों तक बनी रहती है.
 

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पहली डोज लेने के बाद संक्रमित होने पर क्या करें- कर्नाटक के SARS-CoV2 के जेनेटिक कंफर्मेशन के नोडल अधिकारी डॉक्टर वी रवि का कहना है कि कोरोना के लक्षण दिखने के 8 सप्ताह के बाद दूसरी डोज ली जा सकती है. 
 

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संक्रमितों को क्यों दी जाती है वैक्सीन के लिए इंतजार करने की सलाह- संक्रमण के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनने लगती है जो कि वैक्सीन से मिलने वाले असर के बराबर ही होती है. अगर आप कोरोना से संक्रमित है तो आपका शरीर इसके खिलाफ एंटीबॉडी प्रोड्यूस करता है. ऐसे में, जब आप वैक्सीन लेते हैं तो ये इम्यून रिस्पांस को बहुत प्रभावी तरीके से सक्रिय नहीं कर पाती है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स दूसरी डोज लगवाने से पहले कम से कम 8 सप्ताह तक इंतजार करने की सलाह देते हैं. दो डोज के बीच में संक्रमित होने पर किसी को हल्के तो किसी को गंभीर लक्षण महसूस होते हैं. ये इस पर निर्भर करता है कि आपको कोरोना कब हुआ.

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अगर पहली डोज लेने के पहले से तीन सप्ताह के अंदर कोरोना हो जाता है तो वैक्सीन का असर बहुत ज्यादा नहीं होगा. वहीं अगर पहली डोज लगवाने के तीन सप्ताह बाद संक्रमण होता है तो कोरोना के हल्के लक्षण ही नजर आएंगे. वैज्ञानिक अभी भी नेचुरल तरीके और वैक्सीन से मिलने वाली इम्यूनिटी के बारे में पता करने की कोशिश कर रहे हैं. CDC के अनुसार, आमतौर पर वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनने में दो सप्ताह लगते हैं इसलिए इस दौरान संक्रमित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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अगर आप पहले कभी कोरोना नहीं हुआ है और आपने वैक्सीन की पहली डोज भी लगवा ली है लेकिन आपको वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं मिल पा रही हो तो आपके परेशान होने की जरूरत नहीं है. महाराष्ट्र कोविड -19 टास्क फोर्स के सदस्य डॉक्टर शशांक जोशी का कहना है कि दूसरी डोज में देरी पर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन उपलब्ध होने पर तुंरत लगवा लें.

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दुनिया भर में कोरोना की जितनी भी वैक्सीन बनी हैं, उन पर अभी स्टडीज जारी हैं. मेडिकल जर्नल द लैंसेट में हाल ही में छपी एक स्टडी में बताया गया था कि अगर कोविशील्ड दो डोज 12 सप्ताह के अंतर पर ली जाती है तो इसका असर  81.3% तक रहता है. वहीं 6 हफ्ते से भी कम का असर रखने पर ये असर केवल 55.1% तक होता है. प्रोफेसर रवि का कहना है कि मूल सिद्धांत यह है कि दो डोज के बीच जितना लंबा गैप होगा, वैक्सीन उतनी ही असर करेगी.

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कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि पहली डोज कोवैक्सीन की लगवाई है लेकिन दूसरी डोज ना मिलने से क्या इसकी जगह कोविशील्ड लगवाई जा सकती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दो अलग-अलग वैक्सीन लगवाने पर फिलहाल कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. वहीं CDC का कहना है कि Covid-19 के डोज में अदला-बदली नहीं की जा सकती है.

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CDC के अनुसार अगर आपको दूसरी डोज में पहली डोज वाली वैक्सीन नहीं मिल रही है तो बेहतर होगा कि आप अपनी दूसरी डोज को आगे बढ़वा लें. आप 6 सप्ताह तक दूसरी डोज आगे बढ़वा सकते हैं. दो डोज में दो अलग-अलग वैक्सीन लगवाने की बजाए दोनों डोज एक ही वैक्सीन की लगवाना बेहतर होता है.

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