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कोविड-19 के खिलाफ 5 महीने से ज्यादा रहती है इम्यूनिटी, भारतीय साइंटिस्ट की खोज

aajtak.in
  • 14 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 7:58 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित 6,000 लोगों के सैंपल लेने के बाद अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19 (Covid-19) के खिलाफ शरीर में इम्यूनिटी (Immunity) कम से कम पांच महीने तक रहती है. यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में भारतीय मूल के एसोसिएट प्रोफेसर दीप्ता भट्टाचार्य के नेतृत्व में यह शोध किया गया था.

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शोध में एक्सपर्ट ने पाया कि SARS-CoV-2 खिलाफ इंसान के शरीर में एंटीबॉडीज (Antibodies) तकरीबन पांच महीने तक रहती है. प्रोफेसर दीप्ता भट्टाचार्य ने कहा, 'हमने यह स्पष्ट रूप से देखा है कि SARS-CoV-2 का इंफेक्शन होने के बाद भी शरीर में 5 से 7 महीनों तक हाई क्वालिटी एंटीबॉडीज प्रोड्यूस हो रहे हैं.'

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'जर्नल इम्यूनिटी' में प्रकाशित इस रिपोर्ट में भट्टाचार्य ने बताया कि कोविड-19 के खिलाफ इम्यूनिटी के लंबे समय तक ना रहने की वजह से चिंता व्यक्त की जा रही है. हमने इस तरह के सवालों को इन्वेस्टिगेट करने के लिए इस स्टडी का इस्तेमाल किया है. हमने पाया कि शरीर में इम्यूनिटी डेवलप होने के बाद कम से कम पांच महीने तक रहती है. यह शोध प्रोफेसर जान्को निकोलिच जुगिच ने कंडक्ट किया था.

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इस स्टडी के परिणाम ऐसे वक्त में सामने आए हैं, जब कई देशों में कोरोना वायरस के री-इंफेक्शन के मामलों की पहचान की जा रही है. अमेरिका में हाल में एक व्यक्ति 48 दिन बाद फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है. एक्सपर्ट ने कहा, 'जब वायरस पहली बार कोशिकाओं को संक्रमित करता है तब इम्यून सिस्टम कम समय तक रहने वाल प्लाज्मा सेल्स को तैनात कर देता है, जो वायरस से तुरंत लड़ने के लिए एंटीबॉडी प्रड्यूस करता है. ये एंटीबॉडी इंफेक्शन होने के 14 दिन के भीतर ब्लड टेस्ट में नजर आ जाते हैं.'

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इम्यून रिस्पॉन्स के दूसरे चरण में लंबे समय तक रहने वाले प्लाज्मा सेल्स का निर्माण होता है, जो हाई क्वालिटी एंटीबॉडी प्रोड्यूस करते हैं, जो कि शरीर में लंबे समय तक रहती है. भट्टाचाराय और निकलोचि जुगिच ने कई महीनों तक SARS-CoV-2 से संक्रमित पाए गए लोगों में एंटीबॉडी के लेवल को ट्रैक किया है.

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उन्होंने पाया कि SARS-CoV-2 एंटीबॉडी कम से कम 5 से 7 महीनों के लिए खून में मौजूद रहती है. उनका मानना है कि इम्यूनिटी बहुत लंबे समय तक बनी रहती है. यूएरिजोना हेल्थ साइंस के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट माइकल डी डेक ने कहा, 'इस स्टडी ने हमें ना केवल कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी के लिए सटीक परीक्षण की क्षमता प्रदान की है, बल्कि हमें ये भी बताया कि लंबे समय तक इम्यूनिटी वास्तविक है.'

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