कोरोना के नए डेल्टा वेरिएंट ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है. इसी बीच रूस के वैक्सीन डेवलपर्स ने दावा किया है कि उनकी Sputnik V वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 90 प्रतिशत तक प्रभावी है. बता दें कि कोरोना के इस वेरिएंट को लेकर WHO भी बहुत ज्यादा चिंतित है. WHO प्रमुख ट्रेडस अधनोम ने पिछले सप्ताह कहा था कि ये वेरिएंट इतना ज्यादा संक्रामक है कि वैक्सीनेट लोगों को भी खतरे में डाल सकता है.
भारत समेत दुनियाभर के देशों में रक्षा कवच बन रही Sputnik V कोरोना के ऑरिजनल स्ट्रेन के खिलाफ भी अच्छे परिणाम दे चुकी है. इससे पहले के क्लीनिकल ट्रायल में वायरस के ऑरिजनल स्ट्रेन के खिलाफ इसका एफिकेसी रेट 92 प्रतिशत पाया गया था.
Sputnik V बनाने वाले गामलेया इंस्टिट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर डेनिस लोगुनोव ने बताया कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ इसका एफिकेसी फिगर डिजिटल मेडिकल और वैक्सीन रिकॉर्ड पर आधारित है. बता दें कि रशियन ऑथोरिटीज ने कोविड-19 की मौजूदा उछाल के लिए अत्यधिक संक्रामक डेल्टा वेरिएंट को ही जिम्मेदार ठहराया है.
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वहीं, दूसरी तरफ रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में 81,000 लोगों में Sputnik V का एफिकेसी रेट 97.8 प्रतिशत पाया गया है. RDIF ने कहा कि यूएई के स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैक्सीनेशन प्रोग्राम के दौरान Sputnik V की प्रभावशीलता की पुष्टि की है.
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रूस की सरकारी एजेंसी ने बताया कि वैक्सीन के एफिकेसी रेट का यह विश्लेषण 8 जून को एकत्रित किए गए डेटा पर आधारित है. Sputnik V कोरोना के घातक इंफेक्शन के खिलाफ प्रभावशाली है और इसके वैक्सीनेशन के बाद लोगों में गंभीर साइड इफेक्ट की शिकायत भी सामने नहीं आई है.
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RDIF के सीईओ किरिल दिमित्रीव ने भी कहा कि स्पुतनिक-वी लोगों में जबर्दस्त इम्यूनिटी पैदा करने में सक्षम है. बेहरीन, हंगरी, मैक्सिको, सर्बिया, अर्जेंटीना, सैन मरीनो समेत दुनियाभर के कई देशों से मिले आंकड़े यही बयां करते हैं कि Sputnik V वाकई में एक लाजवाब वैक्सीन है.
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रशियन ऑथोरिटीज का कहना है कि कोविड-19 की इस नई उछाल के लिए 90 प्रतिशत डेल्टा वेरिएंट ही जिम्मेदार है. साथ ही वो लोग जो वैक्सीन लेने से ऐतराज कर रहे हैं. गामलेया इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर एलेक्जेंडर गिन्ट्जबर्ग के मुताबिक, दुनियाभर के देश अब डेल्टा वेरिएंट को लेकर सीरियस हो गए हैं.
Sputnik V एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है जो एंटीबॉडी के उत्पादन को ट्रिगर करके काम करती है. इसलिए इसके परिणाम स्वरूप शरीर में इन्फ्लेमेशन समेत हल्के-फुल्के साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं. स्पुतनिक वी उन पंजीकृत वैक्सीन में से एक है जिन्हें विश्व स्तर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी शुरुआती दौर में ही मिल गई थी.
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स्पुतनिक-V ब्रिटेन में विकसित हुई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और बेल्जियम में बनी जैनसेन वैक्सीन की तरह ही काम करती है. ये बीमारी का जोखिम बढ़ाए बिना शरीर को वायरस के जेनेटिक कोड के खतरे की पहचान कराती है और उसे लड़ना सिखाती है. वैक्सीनेट होने के बाद शरीर विशेष रूप से कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी प्रोड्यूस करना शुरू कर देता है. इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर आसानी से रखा जा सकता है, जो इसके स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट को आसान बनाता है.
दूसरे वैक्सीन के विपरीत स्पुतनिक-V पहले और दूसरे डोज के लिए वैक्सीन के दो अलग-अलग वर्जन का इस्तेमाल करता है. ये दोनों ही कोरोना वायरस के विशिष्ट 'स्पाइक' को टारगेट करते हैं. लेकिन बॉडी में स्पाइक को पहुंचाने वाले वायरस को बेअसर करने के लिए अलग वेक्टर्स का इस्तेमाल करते हैं.
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