नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने बुधवार को साइरस मिस्त्री को फिर से टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में बहाल कर दिया है. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कहा कि बहाली आदेश चार हफ्ते बाद के लागू होगा और टाटा ग्रुप चाहे तो इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है.
दो सदस्यों वाली पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एस.जे. मुखोपाध्याय ने कहा कि अध्यक्ष पद से साइरस मिस्त्री को हटाना गैर-कानूनी था. साथ ही उन्होंने कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नटराजन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध करार दिया. अपनी याचिका में मिस्त्री ने अन्य आरोपों के साथ कहा कि टाटा संस के संचालन में बाहरी हस्तक्षेप है और अल्पमत शेयरधारकों के हितों पर अत्याचार किया गया.
टाटा संस NCLAT के आदेश पर लेगी कानूनी मदद
साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला आने के बाद टाटा संस की ओर से कहा गया कि एनसीएलएटी द्वारा साइरस मिस्त्री को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में बहाल किए जाने के बाद वह उचित कानूनी सहारा लेगी. टाटा संस ने एक बयान में कहा, 'टाटा संस ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को प्राप्त किया है और उसका विश्लेषण कर रहा है.'
टाटा संस की ओर से बयान में कहा गया, 'यह स्पष्ट नहीं है कि एनसीएलएटी ने कैसे टाटा संस के शेयरधारकों के फैसले के विरुद्ध निर्णय दिया और टाटा ऑपरेटिंग कंपनियों को वैध रूप से गठित शेयरधारक के रूप में सूचीबद्ध किया.' बयान के अनुसार, एनसीएलएटी का आदेश मिस्त्री द्वारा मांगी गई 'विशिष्ट राहत' के परे जाता दिखाई देता है.
दरअसल टाटा ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा को झटका देते हुए NCLAT ने उन्हें बोर्ड की कार्यवाही से दूर रहने का निर्देश दिया है. पीठ ने मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें साइरस मिस्त्री के निष्कासन को लेकर टाटा ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई टाल दी गई थी.
ट्रिब्यूनल ने एक पब्लिक कंपनी से प्राइवेट के रूप में कंपनी के रूपांतरण को भी अवैध माना और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को फिर से टाटा कंपनी को पब्लिक रूप से मान्यता देने के लिए कहा.
वर्ष 2012 में वह टाटा ग्रुप के छठे अध्यक्ष नियुक्त हुए थे और 24 अक्टूबर, 2016 को उन्हें पद से हटा दिया गया था. रतन टाटा द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा के बाद मिस्त्री ने अध्यक्ष का पद संभाला था.
परिवार द्वारा संचालित दो कंपनियों -साइरस इन्वेस्टमेंट्स और स्टर्लिग इन्वेस्टमेंट कॉर्प- के माध्यम से मिस्त्री ने इस फैसले और गलत आचरण के लिए टाटा संस और अन्य के खिलाफ मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) का रुख किया था.
20 फरवरी, 2017 को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का नेतृत्व कर रहे नटराजन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के अध्यक्ष का प्रभार लिया. लेकिन इस फैसले को एनसीएलएटी ने गैर-कानूनी करार दिया है.
साइरस मिस्त्री का परिवार 18.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ अकेले टाटा संस में सबसे बड़ा शेयरधारक है. टाटा संस ने 2017 में पब्लिक कंपनी से प्राइवेट के रूप में कंपनी को बदलने का फैसला किया था, जिसके तहत शेयरधारक अपने शेयरों का ट्रेड नहीं कर सकते हैं. मिस्त्री के परिवार ने इस फैसले का विरोध किया था.
साइरस मिस्त्री को हटाने के पीछ ये था तर्क
टाटा ग्रुप ने कहा था कि साइरस मिस्त्री को इसलिए निकाला गया क्योंकि बोर्ड उनके प्रति विश्वास खो चुका था. ग्रुप ने आरोप लगाया था कि मिस्त्री ने जानबूझकर और कंपनी को नुकसान पहुंचाने की नीयत से संवेदनशील जानकारी लीक की. इसकी वजह से ग्रुप की मार्केट वैल्यू में बड़ा नुकसान हुआ.
अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में मिस्त्री ने बोर्ड को कड़े शब्दों में एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उनके शब्द थे, 'मुझे बस इतना ही कहना है कि निदेशक बोर्ड ने कोई प्रतिष्ठाजनक काम नहीं किया है...अपने चेयरमैन को बिना कोई कारण बताए और उसे अपना बचाव करने का मौका दिए बगैर हटाना... शायद कॉर्पोरेट इतिहास के पन्नों में अपनी तरह की अलग मिसाल होगी.'