रमेश का दिल्ली में मकान है. साल 2011 में रमेश ने इस मकान को किराये पर दे दिया. शुरुआती कुछ साल तक तो रमेश को हर महीने किराया मिल रहा था, लेकिन बाद में किरायेदार ने मकान पर कब्जा कर लिया.
अब रमेश अपने ही मकान से किरायेदार को निकालने के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रहा है. रमेश जैसे कई ऐसे मालिक हैं जिनके मकान पर किरायेदारों ने कब्जा कर लिया है या फिर मनमानी कर रहे हैं.
अब ऐसे किरायेदारों की खैर नहीं है. दरअसल, मोदी सरकार मकान मालिकों के हक में ''नई किराया नीति'' लेकर आ रही है. ये नीति किरायेदारों की दबंगई पर नकेल कसती है.
इसकी जानकारी देते हुए आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया- बहुत से लोग अपनी संपत्ति को किराये पर नहीं देना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि कानूनी आधार कमजोर होने पर वह अपनी संपत्ति को वापस नहीं पा सकेंगे.
मोदी सरकार के मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक नई किराया नीति लोगों की इसी चिंता का समाधान करेगी. इसके साथ ही किराया नीति से शहरी इलाकों में आवास की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने बताया कि यह नीति देशभर में खाली पड़े लाखों मकानों को किराये पर देने के लिए प्रोत्साहित करेगी. यह किराया नीति एक आदर्श मसौदे की तरह होगी, जिसमें राज्य अपनी इच्छा अनुसार बदलाव कर सकेंगे.
बता दें कि अभी किरायदारी से जुड़े अलग-अलग राज्यों के कानून किरायेदारों के पक्ष में हैं.
ऐसे में अकसर ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें किरायदारों ने इन संपत्तियों
पर कब्जा जमा लिया या कई सालों से मामूली किराया चुकाने के साथ प्रॉपर्टी
खाली नहीं कर रहे हैं.