आपके घर में टाटा का कोई प्रोडक्ट न हो, ये नामुमकिन सा है. नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़े टाटा ग्रुप का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत मुंबई के एक ट्रेडिंग फर्म से की थी जो आज दुनिया भर में अपना विस्तार कर चुकी है.
इस विस्तार में टाटा ग्रुप की तीसरी पीढ़ी के रतन टाटा का सबसे अहम रोल है. 82 साल के रतन टाटा ने कई ऐसे काम किए जिसने दुनियाभर में भारत को गौरवान्वित किया. हालांकि कुछ ऐसे भी मोर्चे थे, जहां उनका सपना अधूरा रह गया. आज हम रतन टाटा के जन्मदिन के मौके पर उसी अधूरे सपने के बारे में बताएंगे..
आज के वक्त में हालत ये हो गई है कि ''नैनो'' का कोई खरीदार नहीं मिल रहा
है. इस वजह से कार का प्रोडक्शन तक ठप हो गया है. साल 2019 के पहले 9
महीने यानी सितंबर तक नैनो कार का कोई प्रोडक्शन नहीं किया गया है. वहीं
साल 2019 में अब तक सिर्फ 1 कार की बिक्री हुई है. यह कार फरवरी में बिकी
थी.
अब कयास ये लगाए जा रहे हैं कि टाटा मोटर्स कभी भी नैनो कार के मॉडल को बंद करने का ऐलान कर सकती है. हालांकि आधिकारिक रूप से इस मॉडल को बंद करने के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में कहा जा सकता है कि रतन टाटा ने जिस सोच के साथ नैनो की शुरुआत की थी वो सही साबित नहीं हुई.
वहीं टूरिज्म और ट्रेवल, टेलीकॉम और मीडिया, ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में भी टाटा ग्रुप अपना लोहा मनवा रही है. बता दें कि टाटा ग्रुप शिक्षा, सशक्तिकरण, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सक्रिय है. यही नहीं, टाटा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैराथन, चेस और टेनिस टूर्नामेंट के अलावा कई तरह के क्विज को स्पॉन्सर किया है. इसके अलावा भारत समेत दुनिया के अलग- अलग हिस्सों में टाटा ग्रुप का इनोवेशन सेंटर भी है.
मार्च 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि टाटा ग्रुप के कर्मचारियों की संख्या 7 लाख से अधिक थी. वहीं 31 मार्च 2019 तक टाटा ग्रुप का मार्केट 1,111,414 करोड़ रुपये था. एक साल पहले मार्च 2018 में ग्रुप का मार्केट कैप 945,117 करोड़ रुपये था.